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रुपया 90 के पार, प्रियंका गांधी ने केंद्र पर निशाना साधा !

मनमोहन सिंह सरकार पर दिए बयान याद दिलाए !

जैसे ही भारतीय रुपया US डॉलर के मुकाबले 90 के पार पहुंचा, विपक्षी कांग्रेस की जनरल सेक्रेटरी प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र की BJP सरकार पर निशाना साधा है और वही सवाल पूछा है जो मौजूदा शासकों ने मनमोहन सिंह सरकार के दौरान डॉलर के मुकाबले रुपया ऊंचा होने पर उठाए थे।

अब तक के हालात
भारतीय रुपया साल 2025 में एशिया की सबसे खराब परफॉर्म करने वाली करेंसी में से एक बन गया है। हाल ही में, गुरुवार सुबह रुपया डॉलर के मुकाबले 90.33 के लेवल पर पहुंच गया, जो पिछले कुछ सालों में 4 से 5 परसेंट की बड़ी गिरावट दिखाता है। रुपये की इस गिरती वैल्यू से देश की इकॉनमी पर पड़ने वाले बुरे असर को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने मीडिया पर सीधा हमला करते हुए कहा, “जब मनमोहन सिंह सत्ता में थे, तो डॉलर की कीमत (रुपये के मुकाबले) ज़्यादा थी, तब उन्होंने क्या कहा था? आज उनका क्या जवाब है? उनसे पूछो, मुझसे क्यों पूछ रहे हो?” उनके इस बयान से साफ़ इशारा मिलता है कि कांग्रेस पार्टी उनके पहले दिए गए बयानों के आधार पर मौजूदा सरकार को ज़िम्मेदार ठहरा रही है। इस बयान से राजनीतिक माहौल गरमा गया है।

पूरी कहानी जानें
कांग्रेस के एक और सीनियर नेता और सांसद मनीष तिवारी ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार का मज़ाक उड़ाते हुए एक दशक से भी ज़्यादा पुरानी कहानी याद दिलाई। उन्होंने कहा कि रुपये का मौजूदा रेट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उम्र से कहीं ज़्यादा बढ़ गया है। मनीष तिवारी ने 2013 में UPA शासन के दौरान की स्थिति को याद करते हुए कहा कि तब BJP प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने एक मज़ाकिया टिप्पणी की थी। रविशंकर प्रसाद ने उस समय कहा था, “जब यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायंस (UPA) सत्ता में आई थी, तो डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की कीमत राहुल गांधी की उम्र के बराबर थी। आज यह सोनिया गांधी की उम्र के बराबर है और बहुत जल्द यह मनमोहन सिंह की उम्र को छू लेगा।” इस एक दशक पुराने बयान का हवाला देते हुए मनीष तिवारी ने ‘X’ (पहले ट्विटर) पर पोस्ट किया और BJP से सवाल करते हुए कहा, “आज रुपया डॉलर के मुकाबले 90.19 पर है, तो अब यह किसकी उम्र का हो गया है? 10 जुलाई 2013 को BJP के मुख्य प्रवक्ता ने रुपये की कीमत के बारे में यह बयान दिया था।” कांग्रेस के उठाए गए इन सवालों ने BJP नेताओं को अपनी ही पहले की गई आलोचनाओं का जवाब देने की स्थिति में ला दिया है।

मार्केट पर क्या असर पड़ रहा है?

रुपये के लगातार कमजोर होने से मार्केट एक्सपर्ट्स ने भी आर्थिक असर की ओर ध्यान दिलाया है। जहां इंपोर्ट पर निर्भर सेक्टर्स को बढ़ती चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं एक्सपोर्ट पर निर्भर इंडस्ट्रीज़ को भी कमाई के बड़े मौके मिल रहे हैं। SBI सिक्योरिटीज में फंडामेंटल रिसर्च के हेड सनी अग्रवाल ने PTI को बताया, “श्रिम्प, टेक्सटाइल, IT, फार्मा, इंजीनियरिंग, मेटल और ऑटो जैसे एक्सपोर्ट पर निर्भर सेक्टर को कमजोर रुपये से फायदा हो सकता है।” ये सेक्टर अपने प्रोडक्ट विदेश में बेचकर डॉलर कमाते हैं और रुपये के कमजोर होने पर उन्हें ज्यादा रिटर्न मिलता है। यह इन इंडस्ट्री के लिए फायदेमंद समय हो सकता है। हालांकि, उन्होंने कहा कि FMCG, प्लास्टिक पॉलीमर और तेल और गैस जैसे इंपोर्ट पर निर्भर सेक्टर को लागत का दबाव झेलना पड़ेगा।

आगे क्या?

मौजूदा हालात के बारे में जानकारी देते हुए, कोटक सिक्योरिटीज में कमोडिटी और करेंसी के हेड अनिंद्य बनर्जी ने कहा, “तेल, मेटल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर के इंपोर्टर्स की लगातार डिमांड के कारण मार्केट में मौजूद डॉलर लिक्विडिटी एब्जॉर्ब हो रही है।” यह फैक्टर रुपये पर दबाव बना रहा है। डॉलर की ज्यादा डिमांड और उसके मुकाबले रुपये में गिरावट से देश के नागरिकों के लिए इंपोर्टेड सामान महंगा हो सकता है, जिससे महंगाई बढ़ने का डर है। अगर केंद्र सरकार ने इम्पोर्ट कम करने और डॉलर के फ्लो को कंट्रोल करने के लिए असरदार कदम नहीं उठाए, तो आने वाले समय में रुपया और कमजोर हो सकता है। मौजूदा राजनीतिक और आर्थिक घटनाक्रम बताते हैं कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में भी चर्चा का केंद्र बना रहेगा, और विपक्ष के सरकार पर हमले और तेज होंगे। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि जब तक इम्पोर्ट डिमांड में बड़ी कमी नहीं आती, रुपये को राहत मिलना मुश्किल है। इसलिए, सबकी निगाहें सरकार के अगले फिस्कल उपायों पर हैं।

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