रायपुर.
विधानसभा के बजट सत्र में आज खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री दयाल दास बघेल ने सवालों का जवाब दिया. धान खरीदी के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में मंत्री ने बताया है कि 16 लाख 55 हजार से अधिक किसानों ने दो लाख 16 हजार हेक्टेयर रकबा समर्पण किया है. इस संबंध में कांग्रेस विधायक दिलीप लहरिया ने सवाल पूछा था.
दिलीप लहरिया ने सवाल पूछा था कि खरीफ विपणन वर्ष2025–26 में प्रदेश में तकनीकी कारणों, एग्रीस्टेक पोर्टल और खरीदी की समय सीमा समाप्त होने के कारण अनेक किसान पंजीयन एवं टोकन होने के बावजूद धान नहीं बेच पाए हैं? यदि हां तो ऐसे किसानों की संख्या कितनी है. एग्रीस्टेक पोर्टल में रकबा/ शून्य कम अथवा त्रुटिपूर्ण दर्शाए जाने के कारण धान विक्रय से वंचित किसानों की आर्थिक क्षति का आकलन किया गया है या नहीं? यदि हां तो क्षतिपूर्ति के लिए शासन ने क्या किया है. इसके अलावा यह भी पूछा गया था कि किसानों से रकबा समर्पण किन परिस्थितियों में तथा शासन की किस नीति या आदेश के तहत कराया गया है ? अब तक कितने किसानों ने रकबा खसरा समर्पित किया है. ऋण वसूली के संबंध में भी सवाल पूछते हुए कांग्रेस विधायक दिलीप लहरिया ने पूछा कि जिन ऋणी किसानों का धान नहीं खरीदा जा सकता है. उनके
अल्पकालीन कृषि ऋण के संबंध में शासन की क्या नीति है?
खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने अपने जवाब में बताया है कि धान खरीदी अवधि के दौरान किसानों द्वारा लाये गये मानक धान का पूर्ण खरीदी किया गया है. जिन किसानों के द्वारा धान विक्रय का कार्य पूर्ण किया जा चुका है, उनसे रकबा समर्पण कराया जा सकता है. संबंधी निर्देश थे. खरीफ वर्ष 2025-26 में 1655149 किसानों ने 2.16 लाख हेक्टेयर रकबा का समर्पण किया. मंत्री ने बताया है कि जिन ऋणी कृषकों के द्वारा धान उपार्जन अवधि के दौरान अपना धान उपार्जन केन्द्रों विक्रय के लिए नहीं लाया गया है. उनके शेष ऋणों की वसूली देय तिथि के पूर्व कृषकों से व्यक्तिगत संपर्क कर नगद राशि वसूली की कार्यवाही की जाती है.

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