‘दलित-विरोधी’ टिप्पणी पर AAP का कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा, चंडीगढ़ की सड़कों पर भिड़े कार्यकर्ता
पंजाब की राजनीति में जातिगत अस्मिता और राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई एक बार फिर सड़क पर आ गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग और विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा द्वारा कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ (Harbhajan Singh ETO) के खिलाफ की गई विवादित टिप्पणियों ने राज्य का सियासी पारा गरमा दिया है।
चंडीगढ़: पंजाब की राजनीति में जातिगत अस्मिता और राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई एक बार फिर सड़क पर आ गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग और विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा द्वारा कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ (Harbhajan Singh ETO) के खिलाफ की गई विवादित टिप्पणियों ने राज्य का सियासी पारा गरमा दिया है।
इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी (AAP) ने कांग्रेस को “दलित-विरोधी” बताते हुए जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। सोमवार को चंडीगढ़ में आप नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हाथों में ‘बैंड-बाजा’ लेकर मार्च निकाला, जिसे रोकने के लिए पुलिस को वॉटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा।
क्या है पूरा विवाद?
विवाद की शुरुआत कांग्रेस की एक रैली के दौरान हुई, जहाँ प्रताप सिंह बाजवा ने कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ के पुराने पेशे (बैंड बजाने) का जिक्र करते हुए उन पर तंज कसा। बाजवा ने कहा, “जो पहले बैंड बजाता था, उसका बैंड हम बजाएंगे।” वहीं, राजा वडिंग पर आरोप है कि उन्होंने मंत्री को “गर्दन मरोड़ने” जैसी धमकी दी। इन बयानों को आप ने न केवल मंत्री का अपमान बताया, बल्कि इसे पूरे दलित समाज की मेहनत और ईमानदारी पर हमला करार दिया।
AAP का ‘बैंड-बाजा’ मार्च और पुलिसिया कार्रवाई
आम आदमी पार्टी ने बाजवा को माफी मांगने के लिए 24 घंटे का समय दिया था। अल्टीमेटम खत्म होने के बाद वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा और अन्य मंत्रियों के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने बाजवा के आवास की ओर कूच किया।
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प्रतीकात्मक विरोध: प्रदर्शनकारियों ने बैंड-बाजे के साथ मार्च किया, यह संदेश देने के लिए कि किसी भी ईमानदारी के काम में कोई छोटा-बड़ा नहीं होता।
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गिरफ्तारियां: पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोका और हरपाल सिंह चीमा, मोहिंदर भगत, और रवजोत सिंह सहित कई वरिष्ठ नेताओं को हिरासत में लिया।
“कांग्रेस में दलितों का दम घुट रहा है” – AAP
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा:
“कांग्रेस के नेताओं में अहंकार भर गया है। वे एक ऐसे व्यक्ति का मजाक उड़ा रहे हैं जिसने गरीबी से निकलकर सिविल सेवा परीक्षा पास की और आज मंत्री है। यह उनकी दलित-विरोधी मानसिकता को दर्शाता है। पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी ने भी स्वीकार किया था कि कांग्रेस में दलितों को प्रतिनिधित्व नहीं मिलता।”
कांग्रेस का बचाव: “मुद्दों से भटकाने की कोशिश”
दूसरी ओर, कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। कांग्रेस विधायक अरुणा चौधरी और अन्य नेताओं का कहना है कि आप सरकार अपनी विफलताओं और भ्रष्टाचार के मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए पुरानी बातों और शब्दों को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रही है। उनका दावा है कि बाजवा का बयान राजनीतिक तंज था, न कि जातिगत टिप्पणी।
2027 के चुनाव पर असर?
पंजाब में करीब 35-38% दलित आबादी है, जो किसी भी चुनाव का रुख मोड़ने की ताकत रखती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2022 में भी इसी वोट बैंक ने आप को सत्ता तक पहुँचाया था। अब 2027 के चुनावों से पहले इस तरह के विवाद कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं, खासकर तब जब उनके अपने ही नेता (चन्नी) पार्टी के भीतर भेदभाव की बात उठा चुके हैं।



