‘मछली’ की कहानी के बाद यूपी के जंगलों की बारी, नल्ला मुथु बनाएंगे वन्यजीवन पर खास डॉक्यूमेंट्री

लखनऊ
रणथंभौर की बाघिन ‘मछली’ की जिंदगी को नौ साल कैमरे में कैद कर दुनिया को उसकी कहानी दिखाने वाले मशहूर वन्यजीव फिल्मकार सुब्बैया नल्ला मुथु अब प्रदेश के जंगलों की अनकही कहानियां दुनिया तक पहुंचाएंगे।
बाघों की जिंदगी और जंगल की धड़कन को कैमरे के जरिये कहानी में बदलने वाले नल्ला के अनुभव का लाभ अब प्रदेश के वन्यजीव संरक्षण और प्राकृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने में लिया जाएगा। इसके लिए आठ अक्टूबर को वन विभाग उनके साथ एमओयू करेगा।
एमओयू के तहत दुधवा टाइगर रिजर्व, पीलीभीत, रानीपुर व अमानगढ़ टाइगर रिजर्व आदि में डाक्यूमेंट्री और अन्य फिल्मांकन की दिशा में काम होगा। मुथु को तराई के जंगलों में शूटिंग के लिए तीन वर्ष का समय मिलेगा। बाघों के साथ ही यहां की जैव विविधता, प्राकृतिक आवास, वन्यजीवों के व्यवहार और संरक्षण की चुनौतियों को कहानी का हिस्सा बनाया जा सकता है।
दुर्लभ वन्यजीव और समृद्ध जैव विविधता मौजूद
यह पहल इसलिए भी अहम है क्योंकि तराई के जंगलों में बाघों के साथ हाथी, गैंडा, बारहसिंघा समेत कई दुर्लभ वन्यजीव और समृद्ध जैव विविधता मौजूद है। गौरतलब है कि मुथु के लिए वन्यजीव फिल्मांकन महज कैमरे से वीडियो बनाना नहीं, बल्कि जंगल में लंबे समय तक रहकर उसके किरदारों को समझना रहा है।
रणथंभौर की ‘मछली’ पर बनाई गई उनकी फिल्म ‘द वर्ल्ड्स मोस्ट फेमस टाइगर’ को 66वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ पर्यावरण फिल्म का पुरस्कार मिला। उन्होंने करीब नौ वर्ष तक मछली और उसके वंश की कहानी को कैमरे में दर्ज किया था। वर्ष 2024 में मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में उन्हें वी. शांताराम लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड भी मिला था।
पांच राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार हासिल कर चुके नल्ला के चर्चित काम में ‘टाइगर डायनेस्टी’, ‘टाइगर क्वीन’ और ‘लाइफ फोर्स’ जैसी वन्यजीव फिल्में शामिल हैं। 1987 से फिल्म निर्माण से जुड़े नल्ला ने 11 सीरीज और 55 डाक्यूमेंट्री बनाने के साथ भारतीय वन्यजीवों पर व्यापक काम किया है। इससे पहले वह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में हाई-स्पीड कैमरा विशेषज्ञ के रूप में भी काम कर चुके हैं।



