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अकाली दल की कादियां में रैली पंजाब को बचाने के लिए नहीं बल्कि सुखबीर को बचाने के लिए थी: जगरूप सिंह सेखवां !

पूरे पंजाब से लोग इकट्ठा किए, फिर भी कुछ बड़ा हासिल नहीं हो सका, एक भी पंचायत सदस्य अकाली दल में शामिल नहीं हुआ: जगरूप सिंह सेखवां !

आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के सीनियर नेता जगरूप सिंह सेखवां ने विधायक गुरदीप सिंह रंधावा के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया से बात करते हुए कादियां में शिरोमणि अकाली दल (बादल) द्वारा की गई रैली की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह समारोह चुनाव क्षेत्र या पंजाब को बचाने के लिए नहीं, बल्कि एक परिवार के राजनीतिक हितों की रक्षा के लिए थी।

जगरूप सिंह सेखवां ने कहा कि कादियां में बादल दल की ओर से की गई रैली चुनाव क्षेत्र के लोगों या पंजाब को बचाने के लिए नहीं थी। यह पूरी तरह से सुखबीर बादल और बादल परिवार को की मुहिम थी।
उन्होंने कहा कि हालांकि रैली को कादियां के कार्यक्रम के रूप में पेश किया गया था, लेकिन लोगों को पूरे पंजाब से लाया गया था, जिसमें गुरदासपुर जिले के सभी विधानसभा क्षेत्रों के साथ-साथ रोपड़, लुधियाना, होशियारपुर, तरनतारन और अमृतसर जैसे जिलों के लोग शामिल थे। उन्होंने कहा कि पूरे पंजाब से लोग इकट्ठा हुए थे। यूथ विंग के नेतृत्व ने पूरे राज्य से युवाओं को इकट्ठा किया था, फिर भी वहां कुछ भी बड़ा नहीं किया जा सका।

जगरूप सिंह सेखवां ने आगे कहा कि बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की बार-बार घोषणाओं के बावजूद, शिरोमणि अकाली दल एक भी सार्थक बढ़ोतरी करने में विफल रहा। उन्होंने कहा कि वे घोषणा करते रहे कि 25 सरपंच शामिल होंगे, 30 सरपंच शामिल होंगे, परंतु एक भी पंचायत मेंबर अकाली दल में शामिल नहीं हुआ। वे सिर्फ़ अपने पुराने कैडर को लाए थे, वही लोग जिन्हें वे पंजाब में जहाँ भी रैलियाँ करते हैं, अपने साथ ले जाते हैं।

शिरोमणि अकाली दल में बढ़ रही अंदरूनी फूट की ओर इशारा करते हुए जगरूप सिंह सेखवां ने कहा कि बिक्रम मजीठिया रैली में शामिल नहीं हुए। उन्होंने कहा कि माझा में यह पहली रैली थी। बिक्रमजीत मजीठिया माझा का बड़ा अकाली चेहरा हैं और कादियाँ में उनका न होना यह साबित करता है कि अकाली दल में अंदरूनी दरारें आ गई हैं। दो बड़े पावर सेंटर बन गए हैं। सुखबीर और मजीठिया के बीच बहुत बड़ी खाई पैदा हो गई है। आने वाले समय में अकाली दल और भी टूट सकता है।

जगरूप सिंह सेखवां ने अकाल तख्त के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह के खुलासों का ज़िक्र करते हुए कहा कि उन्होंने यह उजागर किया है कि कैसे एक खास परिवार ने सिख संस्थाओं को बिज़नेस में बदल दिया है। उन्होंने कहा कि एसजीपीसी मामलों में गड़बड़ियाँ हो रही हैं, गुरुद्वारे की ज़मीनें कौड़ियों के दाम बेची जा रही हैं और धार्मिक सेवाओं का व्यापारीकरण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले जहां 8,500 रुपये में पाठ होता था, अब संगत से 5 लाख रुपये तक लिए जा रहे हैं और डेरों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

सुखबीर सिंह बादल की पंजाब पर राज करने का एक और मौका देने की मांग पर सवाल उठाते हुए जगरूप सिंह सेखवां ने कहा कि लोगों ने बादल परिवार को पांच बार सत्ता दी। आपने उस सत्ता का क्या किया? बेअदबी की घटनाएं हुईं, आपने सौदा साध को माफ कर दिया, आपने हमारे सिंहों को शहीद कर दिया, और फिर आप अकाल तख्त साहिब गए, सब कुछ माना, माफी मांगी, पैसे लिए और बाद में आप मुकर गए।

उन्होंने कहा कि पंजाब के लोगों को पूरी तरह पता है कि क्या हुआ है। उन्होंने कहा कि यह मत सोचो कि लोग नहीं समझते। संगत सब जानती है। पंजाब अब तुम्हें नहीं चुनेगा। बल्कि लोग चाहते हैं कि गुरुद्वारे तुमसे आज़ाद हों।

खासकर कादिया बारे जगरूप सिंह सेखवां ने शिरोमणि अकाली दल के टिकट ऐलान की निंदा करते हुए कहा कि उन्होंने कल ही टिकट का ऐलान किया है। उनके उम्मीदवार पर करीब 10 आपराधिक केस दर्ज हैं। उन्होंने आगे कहा कि पार्टी अपराधियों और गैंगस्टरों से जुड़े परिवारों को टिकट दे रही है, उन्होंने तरनतारन के एक केस का ज़िक्र करते हुए सवाल किया कि कुर्बानी और टकसाली के परिवारों को क्यों साइडलाइन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हम अकाली दल से इसलिए अलग हुए हैं क्योंकि हम बादल परिवार की तरह गुरु से मुंह नहीं मोड़ सकते।

जगरूप सिंह सेखवां ने कहा कि गैंगस्टर, अमन-कानून की स्थिति और नशों समेत पंजाब की मौजूदा चुनौतियां बादल सरकार की वजह से हैं। उन्होंने कहा कि 2022 में पंजाब ने आपको पूरी तरह से नकार दिया है। आप चाहे जितनी भी रैलियां कर लें, लोग आपको फिर से पहचान लेंगे और आपकी ही भाषा में जवाब देंगे। उन्होंने आखिर में कहा कि अगली बड़ी लड़ाई गुरुद्वारों को बादलों से मुक्त कराना है।

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