सुपौल
जिले में अब निजी स्कूलों से स्थानांतरण प्रमाण-पत्र अर्थात टीसी लेकर आने वाले बच्चों का सरकारी स्कूलों में दाखिला नहीं रोका जा सकेगा। जिला शिक्षा विभाग ने इसे लेकर सख्त रुख अपनाते हुए सभी स्कूलों को स्पष्ट निर्देश जारी किया है।
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, समग्र शिक्षा अभियान प्रवीण कुमार ने इसको लेकर सभी सरकारी व निजी विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को पत्र भेजकर कहा कि कई अभिभावकों से शिकायत मिली है कि निजी स्कूल की टीसी के आधार पर सरकारी स्कूलों में बच्चों का नामांकन नहीं लिया जा रहा।
तुरंत लिया जाएगा एक्शन
विभाग ने इसे विभागीय निर्देशों की अवहेलना माना है। कहा है कि ऐसी शिकायत पर अब सीधे कार्रवाई की जाएगी। जारी निर्देश में डीपीओ ने कहा है कि निजी स्कूल की टीसी के आधार पर सरकारी स्कूल में बच्चे का एडमिशन होगा।
अगर बच्चे का आधार नहीं बना है, तो जन्म प्रमाण-पत्र या अन्य पहचान पत्र देखकर भी दाखिला देना होगा। आधार के नाम पर किसी का नामांकन नहीं रोका जाएगा।
नामांकन लटकाना गलत
जिला कार्यालय से टीसी सत्यापित कराने के नाम पर दाखिले को लटकाना गलत है। यदि टीसी में वर्णित जानकारी पर कोई शक होता है तो सरकारी स्कूल के प्रधान निजी स्कूल से मौखिक या पत्राचार से एक सप्ताह में सत्यापन करा लेंगे।
हालांकि, निजी विद्यालयों को भी इसमें कुछ बिंदुओं को अंकित करना अनिवार्य कर दिया है। उन्होंने कहा है कि ट्रांसफर सर्टिफिकेट पर स्कूल का यू-डायस कोड, मान्यता अवधि आदि अंकित रहना अनिवार्य होगा।
विभाग ने साफ किया है कि सभी स्कूल सरकार के नियम से बंधे हैं। किसी बच्चे का दाखिला रोकना अब कार्रवाई के दायरे में आएगा।
दरअसल, कई निजी स्कूल संचालक सरकारी स्कूल में जाने वाले बच्चों को टीसी देने में आनाकानी करते हैं या सरकारी स्कूल टीसी को अमान्य बता देते थे। इससे बच्चों का एक साल बर्बाद होने का खतरा रहता था। नए आदेश से अभिभावकों को बड़ी राहत मिलेगी।

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