बॉम्बे हाईकोर्ट की विजय माल्या को अंतिम चेतावनी: “राहत चाहिए तो भारत लौटना होगा, भगोड़े बनकर नहीं ले सकते कानून का लाभ”
बॉम्बे हाईकोर्ट ने विजय माल्या को अंतिम मौका देते हुए कहा कि भगोड़ा व्यक्ति इक्विटेबल रिलीफ का हकदार नहीं है। सरकार ने 15 भगोड़े आर्थिक अपराधियों का डेटा भी साझा किया।

मुंबई: बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि जो व्यक्ति जानबूझकर भारतीय न्याय व्यवस्था से भाग रहा है, वह किसी भी तरह की ‘न्यायोचित राहत’ (Equitable Relief) का हकदार नहीं है। मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने माल्या को अपना इरादा स्पष्ट करने के लिए एक आखिरी मौका दिया है।
अदालत की सख्त टिप्पणी: ‘कानून से लुका-छिपी नहीं चलेगी’ विजय माल्या ने ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम-2018’ की वैधता और खुद को भगोड़ा घोषित किए जाने को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी। इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने दो टूक कहा, “यदि आप वापस नहीं आते हैं, तो हम आपकी याचिका पर सुनवाई नहीं कर सकते। आप अदालत की प्रक्रिया से बच रहे हैं।” हालांकि, कोर्ट ने निष्पक्षता का हवाला देते हुए याचिका तुरंत खारिज नहीं की और माल्या को अगले सप्ताह तक का समय दिया है।
भगोड़े अपराधियों पर सरकार का शिकंजा एक तरफ कोर्ट ने सख्ती दिखाई है, तो दूसरी तरफ केंद्र सरकार ने भी स्पष्ट किया है कि विजय माल्या और ललित मोदी जैसे हाई-प्रोफाइल अपराधियों को वापस लाने की प्रक्रिया जारी है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी द्वारा लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार:
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कुल भगोड़े: 31 अक्टूबर 2025 तक 15 लोगों को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया जा चुका है।
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वित्तीय नुकसान: बैंकों को 26,645 करोड़ रुपये का मूल नुकसान हुआ, जो ब्याज समेत 31,437 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
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रिकवरी: अब तक 19,187 करोड़ रुपये की वसूली की जा चुकी है।
माल्या का बचाव और नया पैंतरा दूसरी ओर, विजय माल्या ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए वसूली गई राशि के आंकड़ों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार और बैंकों के बयानों में विरोधाभास का दावा करते हुए मामले की जांच के लिए एक सेवानिवृत्त जज की नियुक्ति की मांग की है। अब सबकी नजरें अगले सप्ताह होने वाली सुनवाई पर हैं, जहाँ माल्या को यह बताना होगा कि वह भारत लौटेंगे या नहीं।



