मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि इस परियोजना के पूरा होने से अटल बिहारी वाजपेयी के नदियों को जोड़ने के सपने को साकार करते हुए 40 प्रतिशत आबादी को पानी मिल सकेगा।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना (PKC) का नाम बदलकर रामजल सेतु लिंक परियोजना कर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल 17 दिसंबर को संशोधित पीकेसी परियोजना के मेमोरेंडम ऑफ असोसिएशन (MOA) के अवसर पर पार्वती, कालीसिंध और चंबल नदियों का जल राम सेतु जल संकल्प कलश में डाला।
मुख्यमंत्री निवास पर रामजल सेतु लिंक परियोजना का नामकरण करने के बाद भजनलाल शर्मा ने इसका पोस्टर भी जारी किया। उन्होंने कहा कि पिछले साल आज ही के दिन भगवान श्रीराम अपनी जन्मभूमि पर अयोध्या में एक विशाल मंदिर में विराजमान हुए। भगवान श्रीराम ने समुद्र पर पुल बनाकर दुनिया को एक से दूसरे से जोड़ा।
आज राजस्थान सरकार द्वारा पार्वती-काली सिंध-चंबल लिंक परियोजना का नामकरण परिवर्तित कर ‘रामजल सेतु लिंक परियोजना’ करने का निर्णय लिया गया है।
जन-जन की आस्था का सम्मान करते हुए लिया गया यह ऐतिहासिक निर्णय न केवल लोगों की धार्मिक भावनाओं का प्रतिबिंब है, अपितु यह प्रदेश के जल संसाधन… pic.twitter.com/YbhMcqnt6G
— Bhajanlal Sharma (@BhajanlalBjp) January 22, 2025
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने क्या बताया?
प्रधानमंत्री मोदी ने राजस्थान और मध्य प्रदेश को समृद्ध बनाने के लिए नदियों को जोड़ने की महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू की है, भजनलाल शर्मा ने कहा। उन्होंने कहा कि राम सेतु जल परियोजना के पूरा होने पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नदियों को जोड़ने के सपने को साकार करते हुए राज्य की चार चौथाई आबादी को पेयजल और सिंचाई के लिए पानी मिल सकेगा।
चंबल नदी और इसकी सहायक नदियों कुन्नू, कूल, पार्वती, कालीसिंध और मेज का अतिरिक्त वर्षा जल इस लिंक परियोजना में बनास, मोरेल, बाणगंगा, रूपारेल, पर्वतीय और गंभीर नदी बेसिनों में भेजा जाएगा।
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