रांची
हाई कोर्ट के जस्टिस एसके द्विवेदी की अदालत ने कहा कि ट्रेन दुर्घटना में किसी यात्री की मौत होने पर उसके शव से रेलवे टिकट नहीं मिलने के आधार पर मुआवजे का दावा खारिज नहीं किया जा सकता। अदालत ने रेलवे को बनमाली गोप के स्वजनों को आठ लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।
अदालत ने कहा कि मुआवजे से जुड़े नियमों को उदारता से समझना चाहिए, ताकि दुर्घटना के शिकार परिवारों को न्याय मिल सके। केवल तकनीकी कारणों से किसी परिवार को मुआवजे से वंचित करना उचित नहीं है।
अदालत ने रेलवे दावा अधिकरण के उस फैसले को निरस्त कर दिया, जिसमें टिकट नहीं मिलने के कारण मुआवजे का दावा खारिज कर दिया गया था। मामला बनमाली गोप की मौत से जुड़ा है।
उनके स्वजनों ने आठ लाख रुपये मुआवजे की मांग की थी, लेकिन अधिकरण ने 12 सितंबर 2023 को दावा खारिज कर दिया था। इसके बाद स्वजनों ने हाई कोर्ट में अपील की।
भीड़ में धक्का लगने से ट्रेन से गिरे थे बनमाली
स्वजनों के अनुसार, एक सितंबर 2017 को बनमाली गोप पलामू के झींकपानी रेलवे स्टेशन से टाटा-बड़बिल पैसेंजर ट्रेन में सवार हुए थे। उन्हें केंदपोसी जाना था। ट्रेन में काफी भीड़ थी और वह खड़े होकर यात्रा कर रहे थे।

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