लोकतंत्र और मीडिया का संगम: पंजाब CEO अनिंदिता मित्रा ने जनसंचार छात्रों के साथ की ‘चुनावी संवाद’ पर चर्चा

पंजाब की मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) अनिंदिता मित्रा ने आज पंजाब विश्वविद्यालय (PU) के जनसंचार (Mass Communication) विभाग के 34 छात्रों के साथ एक विशेष संवादात्मक सत्र का आयोजन किया। इस सत्र का मुख्य उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया में युवाओं की भागीदारी और आधुनिक संचार माध्यमों के प्रभाव पर चर्चा करना था।

पंजाब की मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) अनिंदिता मित्रा ने आज पंजाब विश्वविद्यालय के जनसंचार (मास कम्युनिकेशन) विभाग के 34 छात्रों के साथ एक जानकारीपूर्ण और संवादात्मक सत्र आयोजित किया। यह सत्र मतदाता जागरूकता, चुनावी सहभागिता और बदलती संचार प्रक्रियाओं पर खुली चर्चा का मंच बना, जहां छात्रों ने बेझिझक अपने सवाल और विचार रखे।

डिजिटल प्लेटफॉर्म की बढ़ती भूमिका

संवाद के दौरान छात्रों ने खास तौर पर युवाओं और पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं तक पहुंच बनाने में डिजिटल मीडिया, सोशल मीडिया और आधुनिक जनसंपर्क रणनीतियों की भूमिका पर अपने सुझाव साझा किए। इस दौरान यह भी चर्चा हुई कि किस तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म लोकतांत्रिक भागीदारी को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बनते जा रहे हैं।

मीडिया की जिम्मेदारी पर जोर

छात्रों को संबोधित करते हुए सीईओ अनिंदिता मित्रा ने कहा कि लोकतंत्र में जनसंचार माध्यमों की भूमिका बेहद अहम है। सही, तथ्यात्मक और संतुलित जानकारी का प्रसार न सिर्फ जनमत निर्माण करता है, बल्कि नागरिकों को सूचित निर्णय लेने में भी सक्षम बनाता है।
उन्होंने कहा कि जनसंचार के छात्र भविष्य के मीडिया पेशेवर हैं और चुनावी प्रक्रिया के दौरान नैतिक पत्रकारिता और जिम्मेदार संचार को बढ़ावा देने में उनकी भूमिका निर्णायक होगी।

निष्पक्षता और विश्वसनीयता के मूल्य

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने छात्रों को प्रेरित किया कि वे अपने शैक्षणिक ज्ञान और रचनात्मक कौशल का उपयोग कर जागरूक जनभागीदारी को बढ़ाएं और मीडिया कार्यप्रणाली में निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता के मूल्यों को हमेशा बनाए रखें।

शैक्षणिक संस्थानों से निरंतर संवाद

छात्रों ने इस प्रत्यक्ष संवाद के लिए आभार जताते हुए सत्र को ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक बताया। यह पहल चुनावी प्राधिकरणों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच निरंतर संपर्क की अहमियत को रेखांकित करती है, जिससे युवाओं में नागरिक दायित्व और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के प्रति समझ और संवेदनशीलता बढ़ सके।

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