Sharadiya Navratri: शारदीय नवरात्रि में इस बार महाअष्टमी और नवमी को लेकर थोड़ा कंफ्यूजन बना हुआ है। बता दें कि महाअष्टमी और नवमी में कन्या पूजन किया जाता है। महाअष्टमी के दिन कन्या पूजन करने और व्रत रखने का विधान है। जबकि महानवमी के दिन हवन करके व्रत का पारण किया जाता है। लेकिन, इस बार महानवमी और अष्टमी की तारीख को लेकर लोगों के बीच में थोड़ा कंफ्यूजन बना हुआ है। जिस वजह से लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि कन्या पूजन रविवार में करें या सोमवार में करें। आइए जानते हैं ज्योतिष से किन दिन अष्टमी और नवमी मनाई जाएगी।
महा अष्टमी और महानवमी 2026 कब ?
पंडित राकेश झा बताते हैं कि पंचांग की गणना के अनुसार, 18 तारीख को सुबह में 8 बजकर 29 मिनट के बाद अष्टमी तिथि का संयोग बनेगा। जबकि 19 तारीख को 10 बजकर 52 मिनट तक अष्टमी तिथि रहेगी। ऐसे में 18 तारीख को उदय तिथि के अनुसार अष्टमी तिथि नहीं लगने की वजह से इस दिन को अष्टमी नहीं मान्य होगा और 19 तारीख को उदया तिथि में अष्टमी होने से 19 तारीख को ही अष्टमी से संबंधित पूजा विधान किया जाएगा और इसी दिन देवी को खोंचा अर्पित किया जाएगा।
वहीं, 20 तारीख को उदय तिथि के साथ नवमी तिथि का आरंभ हो जाएगा और दोपहर में 12 बजकर 50 मिनट तक नवमी तिथि रहेगी। ऐसे में जो लोग नवमी तिथि को कन्या पूजन करते हैं वह 20 तारीख को सुबह में 12 बजकर 50 मिनट से पहले ही कन्या पूजन कर लें। बता दें कि तिथि और मुहूर्त का विवरण यहां पंचांग दिवाकर के अनुसार दिया गया है।
हालांकि, अलग-अलग स्थान और परंपराओं के अनुसार, तिथि और पूजा का समय अलग-अलग हो सकता है ऐसे में अगर कोई कंफ्यूजन है तो अपने स्थानीय पुरोहित से पूछकर ही पूजा करें।
अष्टमी और नवमी में किस देवी की पूजा की जाती है
अष्टमी और नवमी में मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। मां महागौरी को पवित्रता, शांति और सौम्यता का प्रतीक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि मां महागौरी की पूरे विधि विधान से पूजा करने से जीवन में सुख समृद्धि आती है। साथ ही मां सिद्धिदात्री की पूजा करने से यश, बल, मोक्ष और धन की प्राप्ति होती है।

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