प्रयागराज
पी के संगमनगरी प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद और उसके करीबियों की कथित बेनामी संपत्तियों की जांच के लिए पुलिस ने विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया है। यह कार्रवाई अधिवक्ता केपी श्रीवास्तव की शिकायत के बाद की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अतीक अहमद और उसके परिजनों ने अपने करीबी मदन लाल भारतीया के नाम पर धूमनगंज क्षेत्र में कई संपत्तियां खरीदी थीं। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधिकारियों ने संपत्तियों की जांच कर आवश्यक विधिक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
एसआईटी में पुलिस उपायुक्त नगर मनीष कुमार शांडिल्य, एडीएम सिटी सत्यम मिश्र, अपर नगर आयुक्त अरविंद राय, एआईजी स्टाम्प राकेश चंद्रा और पीडीए सचिव विनीत कुमार सिंह को शामिल किया गया है। टीम को संबंधित संपत्तियों के बारे में गोपनीय एवं प्रामाणिक जानकारी जुटाने, दस्तावेजों की जांच करने तथा अवैध रूप से अर्जित संपत्तियां मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आदेश के अनुसार एसआईटी को तीन दिन के भीतर जांच शुरू करनी होगी। साथ ही टीम को प्रत्येक सोमवार को संयुक्त हस्ताक्षरयुक्त साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट अपर पुलिस आयुक्त को देनी होगी। माना जा रहा है कि अतीक अहमद से जुड़े आर्थिक नेटवर्क और बेनामी संपत्तियों के खिलाफ चल रहे अभियान में यह कार्रवाई महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
हर दूसरी शिकायत में है नाम
15 अप्रैल 2023 की रात भले ही माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की मौत हो चुकी हो, लेकिन आज भी शहर में लोग उसके नाम और कारनामों से परेशान हैं। माफिया ने अपने जीवन में इतनी जमीनों पर कब्जा किया कि आज भी हर दूसरी शिकायत में उसका नाम आता है। लोग कभी अतीक तो कभी अशरफ और कभी उसके गुर्गों से खुद के परेशान होने की शिकायत कर रहे हैं। अफसर इस बात को लेकर त्रस्त हैं कि इस माफिया के अपराध की जड़े कितनी गहरी थीं कि मौत के तीन साल बाद भी उसके निशान मिट नहीं रहे हैं।
100 में से 40 से 50 शिकायतें अतीक-अशरफ के नाम
सबसे ज्यादा मामले सदर तहसील की जनसुनवाई में आते हैं। हर दिन आने वाली 100 शिकायतों में 40 से 50 जमीन, संपत्ति कब्जे की शिकायतों में माफिया अतीक अहमद, उसके भाई अशरफ का नाम रहता है। विशेषकर करेली, करैलाबाग, कटुहला, गौसपुर, रसूलपुर समेत अन्य क्षेत्रों के हर मामले में ही उसका नाम रहता है।
गंभीरता से होती है जांच
जिन शिकायतों पर अतीक और अशरफ का नाम आता है, उसकी जांच भी बहुत अधिक गंभीरता से होती है। कई शिकायतों की जांच में बात में सच्चाई भी होती है। अफसरों का कहना है कि माफिया की मौत के बाद उससे परेशान लोग अब धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं। अभी गौसपुर कटहुला में ही पांच बीघा जमीन पर माफिया के गुर्गों ने कब्जा किया था। ऐसे मामलों की सूची बन रही है।

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