नई दिल्ली
पानी की किल्लत से जूझ रही दिल्ली के लिए आगे की राह फिर मुश्किल भरी हो सकती है। राजधानी की प्यास बुझाने के लिए जिन तीन प्रमुख बांधों- लखवार, रेणुका और किशाऊ पर उम्मीदें टिकी थीं, उनका निर्माण कार्य पिछड़ने से दिल्ली की जलापूर्ति योजनाओं को झटका लगा है। विशेष रूप से लखवार बांध के 2031 तक पूरा होने की संभावना थी, अब काम 2034 तक खिंच गया है।
दिल्ली जल बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में शहर में पानी की मांग लगभग 1250 मिलियन गैलन प्रतिदिन (MGD) है, जबकि आपूर्ति केवल 1000 एमजीडी के आसपास ही हो पा रही है। इस 250 एमजीडी के अंतर को पाटने के लिए सरकार ने यमुना पर बनने वाले इन तीन बांधों के लिए सैकड़ों करोड़ रुपये का निवेश किया है। भविष्य का सारा वॉटर इन्फ्रास्ट्रक्चर, जैसे नए ट्रीटमेंट प्लांट और पाइपलाइन नेटवर्क, इन्हीं बांधों से मिलने वाले पानी के भरोसे तैयार किया जा रहा है।
किस डैम से दिल्ली को कितना मिलेगा पानी
डैम दिल्ली को मिलेगा पानी (MGD में)
रेणुका 440
किशाऊ 372
लखवार 135
पानी मिलने की डेडलाइन अब तीन साल आगे बढ़ी
योजना के मुताबिक, 2031 से लखवार बांध से दिल्ली को 135 एमजीडी पानी मिलना था, लेकिन इसकी डेडलाइन अब तीन साल आगे बढ़ा दी गई है। इसी तरह, रेणुका बांध से 2030 तक 440 एमजीडी पानी मिलने की उम्मीद थी, लेकिन इसके निर्माण को लेकर भी फिलहाल कोई ठोस अपडेट नहीं है। इसके अलावा, किशाऊ बांध से भविष्य में 372 एमजीडी पानी मिलना प्रस्तावित है। कुल मिलाकर इन तीनों परियोजनाओं से दिल्ली को 947 एमजीडी अतिरिक्त पानी मिलना है, जो शहर की बढ़ती जनसंख्या की जरूरतों के लिए अनिवार्य है।
बढ़ती आबादी के कारण पानी की मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर
जल बोर्ड के अधिकारियों का साफ कहना है कि बढ़ती आबादी के कारण पानी की मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर लगातार बढ़ रहा है। इस कमी को केवल ट्यूबवेल के जरिए पूरा करना नामुमकिन है। मानक के अनुसार, एक ट्यूबवेल घंटों चलने के बाद भी महज 0.01 एमजीडी पानी ही दे पाता है।

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