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बाढ़ का खौफ और माफिया का रसूख: अजनाला के 100 गांवों की जान फिर खतरे में!

पिछले साल रावी दरिया की बाढ़ से तबाही झेलने वाले अजनाला विधानसभा क्षेत्र के 100 गांवों पर एक बार फिर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। स्थानीय लोगों और भरोसेमंद सूत्रों का आरोप है कि कथित 'राजसी शह' प्राप्त रेत माफिया रावी दरिया का सीना छलनी कर रहा है।

अजनाला (अमृतसर): पिछले साल रावी दरिया की बाढ़ से तबाही झेलने वाले अजनाला विधानसभा क्षेत्र के 100 गांवों पर एक बार फिर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। स्थानीय लोगों और भरोसेमंद सूत्रों का आरोप है कि कथित ‘राजसी शह’ प्राप्त रेत माफिया रावी दरिया का सीना छलनी कर रहा है। डी-सिल्टिंग के नाम पर विभाग द्वारा लगाए गए कैमरों को बंद कर रोजाना करीब 200 अवैध टिप्पर रेत निकाली जा रही है।

अवैध माइनिंग ने किया धुस्सी बांध को कमजोर ग्रामीणों का कहना है कि पिछले साल आई बाढ़ का मुख्य कारण अवैध माइनिंग ही थी। रेत माफिया ने दरिया का कुदरती बहाव बिगाड़ दिया है, जिससे धुस्सी बांध की नींव कमजोर हो गई है। घोनेवाल, कस्सोवाल और चाहड़पुर जैसे इलाकों में बड़े पैमाने पर चल रहे इस अवैध कारोबार से न केवल कुदरत को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि सरकारी खजाने को भी प्रतिदिन करोड़ों रुपये की चपत लग रही है।

प्रशासन और माफिया की ‘कथित’ मिलीभगत हैरानी की बात यह है कि इस पूरे खेल में पुलिस और माइनिंग विभाग के कुछ आला अधिकारियों की संलिप्तता का शक जताया जा रहा है। गांव वालों का आरोप है कि राजनीतिक रसूख के कारण प्रशासन मौन है। वहीं, जब इस बारे में माइनिंग विभाग के एसडीओ सरबजीत सिंह से बात की गई, तो उनका जवाब बेहद गैर-जिम्मेदाराना रहा। उन्होंने कहा कि “ठेकेदार अपनी मर्जी से रेत कहीं भी बेच सकता है, विभाग का इससे कोई संबंध नहीं है।”

बरसात आने से पहले दहशत में ग्रामीण आने वाले मानसून सीजन को लेकर इलाके के लोगों में भारी दहशत है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर अभी इस गैर-कानूनी माइनिंग को नहीं रोका गया, तो एक बार फिर अजनाला के हजारों एकड़ खेत और सैकड़ों घर जलमग्न हो सकते हैं।

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