सरकारी स्कूलों के बच्चों को भी स्टूडेंट डायरी, झारखंड में शिक्षा व्यवस्था को मिलेगा नया आधार

रांची.

अब निजी स्कूलों की तर्ज पर सरकारी स्कूलों के बच्चों को अब स्टूडेंट डायरी दी जाएगी। इसमें पूरे साल के अवकाश से छात्रों-अभिभावकों से सीधा संवाद किया जा सकेगा। ज्ञानोदय योजना के तहत सरकारी व गैर सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में छठी से आठवीं के छात्र-छात्राओं को स्टूडेंट डायरी दी जाएगी।

वहीं, पहली से पांचवीं तक के बच्चों के लिए हिन्दी-अंग्रेजी में पैरेंटल कैलेंडर दिया जाएगा। इसके माध्यम से अभिभावक व बच्चों के बीच सूचना का आदान-प्रदान होगा। अभिभावक घर पर भी अपनी संस्कृति-परिवेश के बारे में बच्चों को जानकारी देंगे। साथ ही, बच्चों के लिखने-पढ़ने में आसानी होगी। कैबिनेट ने राज्य के सरकारी अस्पताल/स्वास्थ्य केन्द्रों में चिकित्सक एवं विशेषज्ञ चिकित्सक के रिक्त पद पर संविदा आधारित नियुक्ति नियमावली, 2026 के गठन की भी स्वीकृति दी है। चिकित्सकों की कमी तथा स्थायी नियुक्ति में होनेवाली देरी को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

दो मेडिकल कालेजों में बढ़ाई जाएंगी सीटें
झारखंड के मेडिकल कालेजों में सीटें बढ़ाई जाएगी। इसके लिए प्रस्ताव पर कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। सत्र 2026-27 से 2029-30 के लिए एमजीएम मेडिकल कालेज, जमशेदपुर और शहीद निर्मल महतो मेडिकल कालेज, धनबाद में एमबीबीएस की सीटें बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ स्नातकोत्तर में नये विषय जोड़ने और स्नातकोत्तर की भी सीटें बढ़ाने की स्वीकृति दी गई है। एमजीएम में इस कार्य के लिए 393 करोड़ और निर्मल महतो मेडिकल कालेज के लिए 495 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं।

आसान हुआ गुरुजी क्रेडिट कार्ड योजना का लाभ लेना
राज्य के आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए बड़ी राहत देते हुए सरकार ने गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना की मार्गदर्शिका में व्यावहारिक संशोधन किए हैं। अब प्रवेश के समय छात्रों द्वारा स्वयं जमा की गई प्रथम सेमेस्टर या वर्ष की फीस की वेब पोर्टल के माध्यम से एकमुश्त प्रतिपूर्ति की जाएगी। इसके अलावा, छात्रों पर वित्तीय बोझ कम करने के लिए 15 लाख रुपए तक के सभी ऋणों पर पांच प्रतिशत मार्जिन मनी को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। योजना के तहत अब तक 3,434 विद्यार्थियों को 291 करोड़ का ऋण स्वीकृत और 65 करोड़ रुपए वितरित किए जा चुके हैं। क्रियान्वयन में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए नालंदा यूनिवर्सिटी और साउथशियन यूनिवर्सिटी समेत भारत सरकार के सभीअधिसूचित केंद्रीय विश्वविद्यालयों को भी योजना के दायरे में शामिल कर लिया गया है। इन संशोधनों से योजना अधिक छात्र-केंद्रित बनेगी और राष्ट्रीय संस्थानों में पढ़ाई के लिए विद्यार्थियों की पहुंच आसान होगी।

पारंपरिक ज्ञान को बढ़ावा देगी ग्रासरूट इनोवेशन इंटर्नशिप योजना
उच्च शिक्षा में पारंपरिक ज्ञान को बढ़ावा देने के लिए 'झारखंड ग्रासरूट्स इनोवेशन इंटर्नशिप योजना' के नए स्वरूप का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसके तहत राज्य के 10,000 स्नातक विद्यार्थियों को आठ सप्ताह की सवेतन इंटर्नशिप दी जाएगी, जिसमें स्टाइपेंड ₹10,000 से बढ़ाकर 12 हजार रुपये कर दिया गया है। पायलट चरण की सफलता के बाद अब इसे राज्य की सभी 4,345 पंचायतों तक विस्तारित किया जाएगा। योजना के तहत छात्र गांवों का भ्रमण कर पारंपरिक ज्ञान और ग्रामीण नवाचारों का डिजिटल दस्तावेज तैयार करेंगे। इसके संचालन पर प्रतिवर्ष 19.33 करोड़ रुपये का वित्तीय भार आएगा। इसमें मेंटर्स का मानदेय बढ़ाकर 30 हजार और समन्वयकों का 80 हजार रुपये किया गया है, जबकि उत्कृष्ट टीमों को राष्ट्रीय संस्थानों में एक्सपोजर विजिट का मौका मिलेगा।

कैबिनेट के अन्य महत्वपूर्ण निर्णय –

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