बिलासपुर
जगदलपुर नगर निगम के एक कर्मचारी को उसकी सहमति लिए बिना बिलासपुर नगर निगम में प्रतिनियुक्ति पर भेजने के मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अंतरिम राहत प्रदान की है। कोर्ट ने 4 अगस्त 2026 के उस आदेश के प्रभाव और क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है, जिसके तहत कर्मचारी को नगर निगम जगदलपुर से नगर निगम बिलासपुर भेजा गया था।
यह मामला गोविंदनारायण सिंह विरुद्ध छत्तीसगढ़ शासन एवं अन्य का है। सुनवाई जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की अदालत में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मनोज चौहान, शासन की ओर से अधिवक्ता आकांक्षा वर्मा तथा प्रतिवादी क्रमांक दो और तीन की ओर से अधिवक्ता ए.एस. कछवाहा उपस्थित हुए।
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 की धारा 58(5) और 58(6) में एक नगर निगम से दूसरे नगर निगम में कर्मचारी की प्रतिनियुक्ति के संबंध में सुरक्षा प्रावधान हैं। सामान्यतः प्रतिनियुक्ति के लिए संबंधित कर्मचारी की सहमति आवश्यक होती है।
अंतरिम व्यवस्था के तहत रोक
शासन ने इसका विरोध करते हुए धारा 58(5) का हवाला दिया, जिसमें कहा गया कि प्रतिनियुक्ति आदेश जारी करने से पहले कर्मचारी की सहमति लेना अनिवार्य नहीं है। हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि कर्मचारी को उसकी सहमति के बिना प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया है।
हालांकि, कोर्ट ने धारा 58(5) और 58(6) की व्याख्या पर कोई अंतिम राय नहीं दी। अंतरिम व्यवस्था के तहत, कोर्ट ने 4 अगस्त 2026 के प्रतिनियुक्ति आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। मामले को चार सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

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