तेल अवीव
इजरायल के चुनाव नतीजों ने देश में राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ा दी है। शुरुआती एग्जिट पोल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन और पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्ष के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा का अनुमान लगाया गया था। इजरायल की 120 सदस्यीय नेसेट में बहुमत हासिल करने के लिए किसी भी गठबंधन को जरूरी 61 सीटें मिलने की संभावना नहीं जताई गई थी।
इजरायल की सेंट्रल इलेक्शन कमेटी के शुरुआती आंकड़ों में नेतन्याहू के गठबंधन को 57 सीटें, जबकि उनके विरोधी गुट को 47 सीटें मिलती दिखाई दीं। स्थानीय समयानुसार सुबह 5:58 बजे तक 41.9% बैलेट बॉक्स की गिनती पूरी हुई थी। शेष 16 सीटें मुख्य रूप से अरब जॉइंट लिस्ट और रा'म गुटों के हिस्से में आईं। गिने गए वोटों में लिकुड को 28% और आइजेनकोट की याशर पार्टी को 21% वोट मिले। हालांकि, वोट प्रतिशत के आधार पर सीधे तौर पर सीटों की संख्या तय नहीं होती।
सरकार गठन में अरब समर्थित पार्टियों की भूमिका अहम
एग्जिट पोल में अरब नेतृत्व वाली पार्टियों को लगभग 18 से 19 सीटें मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। ऐसे में सरकार गठन को लेकर होने वाली बातचीत में इन दलों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, नेतन्याहू और आइजेनकोट दोनों ने सरकार बनाने के लिए इन पार्टियों पर निर्भर रहने को लेकर अलग-अलग स्तर पर संदेह जताया है।
चुनाव की रात अपने संबोधन में नेतन्याहू ने अरब नेतृत्व वाली पार्टियों के समर्थन पर निर्भर सरकार का विरोध दोहराया था। वहीं, आइजेनकोट ने कुछ शर्तों के साथ उनके सहयोग की संभावना के संकेत दिए। इस मुद्दे से विपक्षी गठबंधन के भीतर बातचीत जटिल हो सकती है।
इजरायल में फिर होगें चुनाव?
इजरायली राजनीतिक विश्लेषज्ञों का मानना है कि एग्जिट पोल ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या विपक्षी नेता अरब नेतृत्व वाले समूहों के साथ मिलकर काम करने को तैयार होंगे। अगर नेता अपने चुनावी वादों से पीछे नहीं हटते, तो आने वाले महीनों में एक बार फिर चुनाव होने की संभावना बन सकती है।
7 अक्टूबर के हमले और सैन्य सेवा का मुद्दा
यह चुनाव 7 अक्टूबर 2023 को हमास के नेतृत्व में हुए हमलों और उसके बाद शुरू हुए युद्धों की पृष्ठभूमि में हुआ। नेतन्याहू के विरोधियों ने सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूकों के लिए जवाबदेही की मांग की, जबकि उनके समर्थकों ने हमलों के बाद इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों को अपनी दलील का आधार बनाया।
इजरायल में पहले भी हो चुका है राजनीतिक गतिरोध
इजरायल हाल के वर्षों में कई बार राजनीतिक अस्थिरता का सामना कर चुका है। अप्रैल 2019 से मार्च 2020 के बीच देश में तीन बार चुनाव कराने पड़े, क्योंकि राजनीतिक दल नेसेट में स्थिर बहुमत बनाने में विफल रहे थे।
उस गतिरोध का अंत बेंजामिन नेतन्याहू और उनके तत्कालीन प्रतिद्वंद्वी बेनी गैंट्ज के बीच सत्ता-साझाकरण समझौते से हुआ था। इसके तहत दोनों नेताओं को बारी-बारी से प्रधानमंत्री बनना था। हालांकि, लगभग एक साल बाद बजट पारित नहीं हो पाने के कारण सरकार गिर गई और देश को एक बार फिर चुनाव का सामना करना पड़ा।

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