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जालंधर GST महाघोटाला: 130 करोड़ की टैक्स चोरी में मास्टरमाइंड ‘हैप्पी’ अरेस्ट, विभाग के अंदरखाने ‘डील’ की चर्चा

जालंधर सेंट्रल जीएसटी टीम ने 23 फर्जी कंपनियों के जरिए 130.50 करोड़ की टैक्स चोरी पकड़ी। मुख्य आरोपी जसविंदर माही हैप्पी गिरफ्तार, लेकिन दो अन्य को छोड़ने पर विवाद।

जालंधर : पंजाब के जालंधर में 23 फर्जी कंपनियां बनाकर करीब 1000 करोड़ रुपये का फर्जी टर्नओवर दिखाने और 130.50 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी के मामले में नया मोड़ आ गया है। सेंट्रल जीएसटी (GST) की टीम द्वारा की गई कार्रवाई के बाद जहां टांडा रोड के कारोबारी जसविंदर माही उर्फ हैप्पी को गिरफ्तार किया गया है, वहीं पूछताछ के लिए हिरासत में लिए गए दो अन्य व्यक्तियों को छोड़ दिया गया है। इन दोनों की रिहाई के बाद मामले को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

लगातार छापेमारी और जांच

सेंट्रल जीएसटी टीम पिछले कई दिनों से शहर में छापेमारी और जांच अभियान चला रही थी। टीम ने बशीरपुरा और कमल विहार इलाकों में भी दबिश दी। छापेमारी के दौरान कमल विहार से एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया था। इसके अलावा जूते-चप्पल का सोल बनाने वाले एक कारोबारी को भी पूछताछ के लिए पकड़ा गया था।

हालांकि सूत्रों के मुताबिक पूछताछ के बाद दोनों व्यक्तियों को छोड़ दिया गया है। विभाग की इस कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं कि जब इन दोनों के मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर से अहम जानकारियां मिली थीं, तो फिर उन्हें क्यों रिहा किया गया।

प्लास्टिक कारोबार और दिल्ली कनेक्शन

जांच में सामने आया है कि फर्जी कंपनियों के जरिए प्लास्टिक और स्क्रैप की खरीद-फरोख्त दिखाई गई। प्लास्टिक और स्क्रैप पर 18 प्रतिशत जीएसटी लागू होती है। विभाग ने इसी मद में 130.50 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी पकड़ी है।

सूत्रों का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क के तार दिल्ली के एक बड़े प्लास्टिक कारोबारी से जुड़े हुए हैं। आरोप है कि जालंधर के कुछ कारोबारी दिल्ली के कारोबारियों के साथ मिलकर फर्जी बिलिंग का खेल चला रहे थे।

दो लोगों की रिहाई पर सवाल

सूत्रों के अनुसार कमल विहार और बशीरपुरा के जिन दो व्यक्तियों को रिहा किया गया, उनके खिलाफ इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों में महत्वपूर्ण जानकारी मिली थी। आरोप यह भी है कि इन दोनों ने शहर के एक बड़े चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) के माध्यम से विभाग के कुछ अधिकारियों के साथ कथित तौर पर लाखों रुपये की डील की, ताकि उनका नाम केस से बाहर किया जा सके।

हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और विभागीय अधिकारी इस मामले में कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।

एक गिरफ्तारी, कई नाम चर्चा में

इस मामले में फिलहाल जसविंदर माही उर्फ हैप्पी की गिरफ्तारी दिखाई गई है। बताया जा रहा है कि वह टांडा रोड का कारोबारी है और फर्जी कंपनियों के संचालन में उसकी अहम भूमिका रही है।

लेकिन सूत्रों का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क में इंडस्ट्रियल इलाके सोढ़ल का एक बड़ा ट्रांसपोर्टर, शहर का एक प्रमुख चार्टर्ड अकाउंटेंट और प्लास्टिक कारोबार से जुड़े कई बड़े व्यापारी शामिल हैं। इन कारोबारियों की दिल्ली के बड़े व्यापारिक समूहों से कथित सांठगांठ की भी चर्चा है।

राजनीतिक दखल की चर्चा

मामले में एक स्थानीय नेता की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं हैं। आरोप है कि कुछ प्रभावशाली लोगों ने विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर केस को कमजोर करने की कोशिश की है, ताकि नामी कारोबारियों को बचाया जा सके।

यह भी कहा जा रहा है कि पूरे मामले को ठंडा करने के लिए लाखों रुपये की डील हुई है। हालांकि इन दावों की पुष्टि नहीं हुई है और जांच एजेंसियों ने इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।

आगे क्या?

अब बड़ा सवाल यह है कि 1000 करोड़ रुपये के फर्जी टर्नओवर से जुड़ी 23 कंपनियों के असली संचालकों के खिलाफ क्या कानूनी कार्रवाई की जाएगी। क्या सभी आरोपियों पर केस दर्ज होगा या फिर मामला एक ही गिरफ्तारी तक सीमित रह जाएगा?

फिलहाल विभागीय अधिकारी जांच जारी होने की बात कह रहे हैं, लेकिन आधिकारिक तौर पर ज्यादा जानकारी साझा नहीं की जा रही।

इस बड़े जीएसटी फर्जीवाड़े ने जालंधर के कारोबारी और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और संभावित कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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