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JPSC विवाद का असर भर्ती प्रक्रिया पर, 1,645 पदों पर नियुक्ति अटकी

रांची
 झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और घोटालों का असर नियुक्ति प्रक्रिया पर पड़ा है। इस्तीफा के बाद आयोग में अध्यक्ष एवं सदस्य के नहीं होने से नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह ठप हो चुकी है।

आयोग की कार्यप्रणाली और परीक्षाओं में सुधार की कवायद चल रही है। ऐसे में जेपीएससी में अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति होने के बाद ही नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ पाएगी। नियुक्ति परीक्षाओं में गड़बड़ी का असर उन सात प्रतियोगिता परीक्षाओं पर पड़ा ही है, जो अगस्त और सितंबर माह में आयोजित होनेवाली थी।

इसका असर आनेवाली बहालियों पर भी पड़ा है। गड़बड़ियों की सीआइडी जांच शुरू होने तथा अध्यक्ष के पद से एल खियांग्ते के इस्तीफा के बाद आयोग ने सात परीक्षाओं को स्थगित कर दिया। इन सभी परीक्षाओं की तिथियां घोषित की जा चुकी थीं।

गड़बड़ियों का असर अन्य परीक्षाओं पर भी पड़ा जो अक्टूबर से दिसंबर के बीच आयोजित होनेवाली थी। आयोग में कई विभागों से नियुक्ति की अधियाचनाएं भी मिली हैं। उन नियुक्ति परीक्षाओं का विज्ञापन भी जारी नहीं हो पा रहा है।

बताते चलें कि 21 जुलाई को सीआइडी जांच शुरू होने के बाद तत्कालीन अध्यक्ष एल खियांग्ते ने 22 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद तीनों सदस्यों अजिता भट्टाचार्य, अनिमा हांसदा तथा जमाल अहमद ने भी हाल में इस्तीफा दे दिया।

जेपीएससी से 1,645 पदों पर होनी है नियुक्ति
झारखंड विधानसभा में छह अगस्त को पेश की गई एक्शन टेकेन रिपोर्ट (एटीआर) में ही कार्मिक विभाग ने जानकारी दी कि जेपीएससी से 1,645 विभिन्न पदों पर नियुक्ति होनी है।

इसमें कहा गया कि जेपीएससी के माध्यम से वर्ष 2020 से अबतक कुल 3,377 पदों पर नियुक्ति हुई है। वहीं, 798 पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया जा चुका है, जबकि 847 पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी करने की प्रक्रिया चल रही है।

महत्वपूर्ण परीक्षाओं के परिणाम पर भी असर
नियुक्ति प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी का असर कई महत्वपूर्ण परीक्षाओं पर भी पड़ा है। इनमें विश्वविद्यालयों एवं अंगीभूत कालेजों में सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति को लेकर अर्हता तय करने से संबंधित झारखंड पात्रता परीक्षा (जेट) प्रमुख हैं, जो राज्य में 18 वर्ष बाद आयोजित हुई है। इसका परिणाम जारी किया जाना है।

 

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