पंजाबराज्य

एलपीजी संकट के बीच मोगा के किसान का समाधान: बायोगैस से जल रहा चूल्हा, 20,000 में बचाए लाखों रुपये

मोगा 

देश भर में एलपीजी संकट के बीच लोग सिलिंडर के लिए लंबी-लंबी कतारों में घंटों खड़े रहने को मजबूर हैं। वहीं मोगा के गांव राजेआना के किसान निर्मल सिंह मौज में हैं। दरअसल, निर्मल सिंह ने साल 2011 में मात्र 20 हजार रुपये की लागत से अपने घर में बायोगैस प्लांट लगाया था। इस प्लांट से निकलने वाली गैस से ही उनके घर का खाना तैयार होता है। आज जब एलपीजी के लिए लोग परेशान हैं, वहीं निर्मल सिंह को उनके इस बायोगैस प्लांट ने बड़ी राहत दी है। उन्हें न तो लंबी लाइनों में लगना पड़ रहा है और न ही महंगे दामों पर गैस सिलिंडर खरीदना पड़ रहा है। किसान के लिए बायोगैस एक वरदान साबित हुआ।

25 गज में 20 हजार की कीमत से लगाया प्लांट
निर्मल सिंह ने बताया कि उन्होंने घर में दूध के लिए पशु पाले हुए हैं, जिनसे निकलने वाले गोबर का सही उपयोग करने के उद्देश्य से उन्होंने अपने घर पर बायोगैस प्लांट लगाया। यह प्लांट लगभग 25 गज क्षेत्र में करीब 20 हजार रुपये की लागत से तैयार किया गया था। उन्होंने कहा कि शुरुआत में उन्हें इस बायोगैस प्लांट का खास फायदा समझ नहीं आया, लेकिन आज जब देश में LPG को लेकर संकट है तब उन्हें इस बायोगैस का असली महत्व समझ आया। 

निर्मल सिंह ने कहा कि उनके घर में तो जैसे अपनी ही गैस एजेंसी खुली हुई है, इसलिए उन्हें कभी लाइन में लगने की जरूरत नहीं पड़ी। पिछले 15 साल में उन्होंने करीब 1.5 लाख रुपये की बचत की है, वह भी बिना किसी अतिरिक्त खर्च के। उन्होंने बताया कि इस प्लांट को चलाने में कोई खास मेहनत नहीं लगती। रोजाना केवल दो टोकरी गोबर को पानी के साथ मिलाकर प्लांट में डालना होता है। सुबह यह प्रक्रिया करने के बाद शाम तक गैस तैयार हो जाती है। इस गैस से उनके 5 सदस्यों वाले परिवार का खाना आराम से बन जाता है। 

पूरी तरह सुरक्षित है बायोगैस
निर्मल सिंह ने बताया कि बायोगैस पूरी तरह सुरक्षित है और इसमें गैस लीकेज से आग लगने का कोई खतरा नहीं होता। उन्होंने कहा कि पंजाब में ज्यादातर किसानों के पास पशु होते हैं, इसलिए सभी किसानों को इस तकनीक का लाभ उठाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि बायोगैस अपनाने वाले किसानों पर एलपीजी संकट का कोई असर नहीं पड़ेगा। कम खर्च, कम मेहनत और अधिक लाभ, यही बायोगैस की सबसे बड़ी खासियत है। आधुनिक दौर में यह पुरानी तकनीक किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकती है। 

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