DSDMA कर्मियों को बड़ी राहत, दिल्ली सरकार ने मानदेय में 100% वृद्धि की

नई दिल्ली
दिल्ली सरकार ने 16 साल बाद दिल्ली राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DSDMA) के कर्मचारियों के मानदेय में 100 फीसदी तक बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। इस आदेश के तहत DSDMA में काम कर रहे प्रोजेक्ट ऑफिसर, डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट ऑफिसर और प्रोजेक्ट कॉर्डिनेटर के मानदेय में 100 फीसदी तक इजाफा होगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि साल 2009 के बाद पहली बार इन कर्मचारियों के मानदेय में बदलाव किया गया है।

    2009 के बाद पहली बार बदलाव, नए सैलरी सिस्टम को सरकार की मंजूरी
    100% तक की बढ़ोतरी दिल्ली सरकार ने सैलरी में की है
    इसका मकसद आपदा प्रबंधन को मजबूत करना: CM
    समान लेवल के संविदा पदों की सैलरी इनसे थी अधिक

क्या काम करते हैं ये कर्मचारी?
मुख्यमंत्री के अनुसार ये कर्मचारी आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत जरूरी जिम्मेदारियां निभाते हैं। इनमें जिला आपदा प्रबंधन योजना तैयार करना, जोखिम का आकलन करना, संवेदनशील इलाकों की पहचान करना, विभागों के बीच तालमेल बैठाना शामिल है। ये ट्रेनिंग प्रोग्राम और मॉक ड्रिल भी कराते हैं।

CM ने जाना जमीनी हाल
सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं का जमीनी हाल जानने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता मयूर विहार फेज-2 स्थित लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल पहुंचीं। उन्होंने अधिकारियों की रिपोर्ट पर भरोसा करने के बजाय सीधे मरीजों और उनके परिजनों से बातचीत कर इलाज, दवाइयों और अस्पताल की सुविधाओं का फीडबैक लिया।

जेल में अप्राकृतिक मौत पर ₹7.5 लाख मुआवजा
दिल्ली सरकार ने राजधानी की जेलों में हिरासत के दौरान होने वाली अप्राकृतिक मौत के मामलों में कैदी के निकटतम परिजन या कानूनी वारिस को मुआवजा देने की योजना लागू कर दी है। योजना के तहत परिस्थितियों के आधार पर 5 लाख रुपये से 7.5 लाख रुपये तक का मुआवजा दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना एनएचआरसी के दिशानिर्देशों के हिसाब से बनाई गई है। उनका कहना है कि सरकार का मकसद पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना है।

छत्तीसगढ़ के लिए दुखद समाचार, कुलगाम में मारे गए मजदूरों के परिजनों के लिए मुआवजा राशि घोषित
किसी आपदा से हुई मौत भी योजना के दायरे में शामिल नहीं होगी
यह योजना केवल उन मामलों में लागू होगी, जिनमें अधिसूचना की तारीख या उसके बाद दिल्ली की किसी जेल में कैदी की अप्राकृतिक मौत हुई हो। कैदियों के बीच झगड़े या जेल कर्मियों द्वारा कथित यातना अथवा मारपीट से मौत होने पर 7.5 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। अधिकारियों या कर्मचारियों की ड्यूटी में लापरवाही, मेडिकल या पैरामेडिकल अधिकारियों की लापरवाही व आत्महत्या के मामलों में 5 लाख रुपये का मुआवजा मिलेगा। प्राकृतिक मौत या बीमारी से हुई मौत पर इस योजना का फायदा नहीं मिलेगा। किसी आपदा से हुई मौत भी योजना के दायरे में शामिल नहीं होगी।

कैसे मिलेगी मंजूरी
जेल अधीक्षक हर मामले में मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मौत का आखिरी कारण, कैदी की मेडिकल हिस्ट्री और मौत से पहले दिए गए इलाज का पूरा ब्योरा महानिदेशक (कारागार) को भेजेंगे। कमेटी इन मामलों की समीक्षा करेगी। इसके बाद प्रशासनिक सचिव के पास प्रस्ताव भेजा जाएगा।

Exit mobile version