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फ्रांस के साथ ‘मेक इन इंडिया’ डील: 96 राफेल विमान भारत में बनेंगे, रक्षा उत्पादन में आएगा क्रांति

रक्षा मंत्रालय ने 114 राफेल लड़ाकू विमानों और 6 P-8I पॉसिडॉन विमानों की खरीद को मंजूरी दी। 96 राफेल विमान 'मेक इन इंडिया' के तहत भारत में बनेंगे।

India Rafale Deal : भारतीय वायुसेना के बेड़े में और मजबूती आने वाली है। रक्षा मंत्रालय की रक्षा खरीद परिषद (DAC) ने फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी दे दी है। इसके अलावा भारतीय नौसेना के लिए 6 अतिरिक्त P-8I पॉसिडॉन एयरक्राफ्ट की डील को भी हरी झंडी मिली है। यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय बैठकों के बाद लिया गया। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन की भारत यात्रा से ठीक पहले यह फैसला हुआ, जिससे दोनों देशों के बीच रक्षा संबंध और मजबूत होंगे।

96 विमान भारत में निर्मित होंगे

राफेल डील भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। कुल 114 विमानों में से 18 विमान फ्लाई-अवे कंडीशन में सीधे फ्रांस से आयेंगे, जबकि बाकी 96 विमान भारत में निर्मित होंगे। इस कदम से ‘मेक इन इंडिया’ को बड़ा बढ़ावा मिलेगा और हजारों नई नौकरियों का सृजन होगा। इसमें कुछ दो सीट वाले विमान भी शामिल होंगे, जिनका उपयोग पायलटों को प्रशिक्षण देने के लिए किया जाएगा। भारतीय वायुसेना के पास पहले से 36 राफेल विमान हैं, और इस नई डील के बाद उनकी स्क्वाड्रन संख्या 35–36 के करीब पहुंच जाएगी।

राफेल विमानों की खासियत

राफेल विमानों की खासियत यह है कि यह मल्टी-रोल फाइटर जेट हैं। इन्हें हवा से हवा, हवा से जमीन और समुद्री हमलों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। लंबी दूरी तक उड़ान क्षमता, तेज रफ्तार और अत्याधुनिक हथियारों से लैस होने के कारण यह वायुसेना की ताकत को कई गुना बढ़ाएंगे। राफेल विमान पहले ही ऑपरेशन सिंदूर में अपनी क्षमता दिखा चुके हैं, जिसमें पाकिस्तान के ठिकानों पर सटीक हवाई हमले किए गए थे। इन विमानों में स्कैल्प मिसाइल, मेटियोर हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल, हैमर हथियार, स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और अत्याधुनिक रडार जैसी तकनीक मौजूद है, जो चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों से खतरे का मुकाबला करने में अहम भूमिका निभाएंगी।

P-8I पॉसिडॉन एयरक्राफ्ट समुद्री निगरानी के लिए महत्वपूर्ण

भारतीय नौसेना के लिए खरीदे गए 6 अतिरिक्त P-8I पॉसिडॉन एयरक्राफ्ट समुद्री निगरानी और खुफिया मिशन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यह विमान दुश्मन की सबमरीन, जहाज और एयरक्राफ्ट को दूर से ही ट्रैक कर सकता है। भारत के पास पहले से 12 P-8I विमान हैं, और नए 6 विमानों के आने से हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा और बढ़ेगी, खासकर चीन की बढ़ती गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए।

डील की कुल लागत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये

इस डील की कुल लागत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है, जो भारत का अब तक का सबसे बड़ा रक्षा सौदा होगा। यह सौदा गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट (G2G) डील के तहत हुआ है, जिससे अधिक पारदर्शिता बनी रहेगी। पुराने विमानों के रिटायर होने और नए आधुनिक विमानों की आवश्यकता को देखते हुए यह कदम वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए बेहद जरूरी था।

मेक इन इंडिया’ को मिलेगी मजबूती

राफेल और P-8I विमानों की खरीद न केवल भारत की सुरक्षा और रणनीतिक क्षमताओं को बढ़ाएगी, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ को भी मजबूती देगी और देश में हजारों रोजगार पैदा होंगे। इस डील के साथ ही भारतीय वायुसेना और नौसेना की ताकत नए स्तर पर पहुँच जाएगी और देश की रक्षा उत्पादन क्षमता भी मजबूत होगी।

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