लखनऊ
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) में कार्यरत करीब 98 हजार कार्मिकों के वेतन में असमानता दूर कर एकरूप वेतन नीति लागू करने की मांग तेज हो रही है। संयुक्त राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ ने सेवा अवधि, वरिष्ठता, पद, योग्यता, कार्य की प्रकृति और जिम्मेदारियों के आधार पर वेतन पुनर्निर्धारण के साथ कर्मचारियों को आउटसोर्स सेवा निगम में शामिल करने की मांग की है। मांगों की अनदेखी पर स्वास्थ्य सेवाएं ठप करने की चेतावनी दी गई है।
एनएचएम कर्मियों को आउटसोर्स सेवा निगम में शामिल करने की मांग
संघ के प्रदेश महामंत्री योगेंद्र उपाध्याय के मुताबिक, एनएचएम में 13 हजार सेवा प्रदाता (आउटसोर्स) और 75 हजार स्वास्थ्य समिति से अनुबंधित कार्मिक हैं। अन्य श्रेणियों को मिलाकर संख्या करीब 98 हजार है। ये स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे है। बावजूद इसके एनएचएम कर्मियों के लिए समान वेतन नीति नहीं बनी है।
स्थायी एएनएम को करीब 40 हजार रुपये मासिक जबकि एनएचएम कर्मी को 11 हजार रुपये मिलता है। स्थायी लैब सहायक को करीब 40 हजार रुपये, जबकि एनएचएम कर्मी को 13 हजार रुपये मिलते हैं।
चतुर्थ श्रेणी के सामान्य संविदा कर्मी को करीब 18 हजार रुपये और एनएचएम कर्मी को 10 हजार रुपये वेतन मिलता है। सभी वर्गों में वेतन विसंगति बनी हुई है।
मध्य प्रदेश, बिहार और हरियाणा के अनुरूप वेतन निर्धारण किया जाए
योगेंद्र उपाध्याय ने दावा किया कि वर्ष 2016 से एनएचएम कर्मियों की वेतन विसंगतियां दूर करने के सुझाव दिए जाते रहे हैं। मध्य प्रदेश, बिहार और हरियाणा समेत कुछ राज्यों में कार्य और दायित्व के अनुरूप वेतन का निर्धारण कर भी लिया। संघ के अनुसार, वर्ष 2018 से केंद्र सरकार के अनुमोदित आरओपी (रिकॉर्ड ऑफ प्रोसीडिंग्स) में एनएचएम के वेतन और मानव संसाधन संबंधी जरूरतों के लिए बजट का प्रावधान किया जा रहा है।
स्वाइन फ्लू के चलते जनहित में आंदोलन की तिथि घोषित नहीं की जा रही है। स्थिति सामान्य होते ही आंदोलन शुरू किया जाएगा।

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