राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु: तीन नए आपराधिक कानूनों में अपराध जांच और साक्ष्य को सुधार किया गया है
गांधीनगर में आज हुए राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने भाग लिया।
इस अवसर पर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि न्याय पर आधारित सामाजिक व्यवस्था हमारे देश में सर्वश्रेष्ठ है। हम न्याय पर आधारित विकसित भारत बना रहे हैं, विरासत और विकास को जोड़कर। गृह मंत्रालय ने पिछले कुछ वर्षों में फोरेंसिक विज्ञान क्षेत्र में सुविधाओं और क्षमता को मजबूत करने के लिए बहुत कुछ किया है।
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि समावेशी न्याय प्रणाली ही मजबूत मानी जाती है। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि उनका लक्ष्य समाज के सभी वर्गों, खासकर कमजोर और वंचित लोगों को फोरेंसिक साक्ष्य के आधार पर निष्पक्ष और जल्दी न्याय देना होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे देश की सुशासन में भाग लें।
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि तीन नए आपराधिक कानूनों में अपराध जांच और साक्ष्य को सुधार किया गया है। अब सजा की अवधि सात वर्ष या उससे अधिक होने वाले मामलों में फोरेंसिक विशेषज्ञ का घटनास्थल पर जाकर जांच करना अनिवार्य है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता ने सभी राज्यों को समयबद्ध फोरेंसिक सुविधाओं का निर्माण करने का निर्देश दिया है। कई देशों में समयबद्ध फोरेंसिक जांच अनिवार्य है। राष्ट्रपति ने कहा कि इन परिवर्तनों से फोरेंसिक विशेषज्ञों की मांग बढ़ेगी।
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि प्रौद्योगिकी में तेजी से हो रहे बदलावों, विशेषकर डिजिटल प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में, के कारण अपराधी नए तरीके खोज रहे हैं, लेकिन फोरेंसिक विज्ञान विशेषज्ञों की क्षमता भी बढ़ रही है। हमारी पुलिसिंग, अभियोजन और आपराधिक न्याय वितरण प्रणाली में काम करने वाले लोग अपराधियों से अधिक बुद्धिमान, तत्पर और सतर्क हैं, इसलिए वे अपराध को नियंत्रित करने और न्याय को सुलभ बनाने में सक्षम हैं। उनका मानना था कि राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय के सहयोग से मजबूत फोरेंसिक प्रणाली बनाई जाएगी, सजा की संभावना बढ़ेगी और अपराधी अपराध करने से डरेंगे।