असम के गुवाहाटी में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने झुमोर बिनंदिनी कार्यक्रम में भाग लिया।
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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने असम के गुवाहाटी में मेगा झुमोर कार्यक्रम, झुमोर बिनंदिनी 2025 में भाग लिया।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने असम के गुवाहाटी में मेगा झुमोर कार्यक्रम, झुमोर बिनंदिनी 2025 में भाग लिया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में उत्साह, ऊर्जा और उत्साह का माहौल था। झुमोर के सभी कलाकारों द्वारा की गई शानदार तैयारियों का उल्लेख किया, जिसमें चाय के बागानों की सुंदरता और खुशबू झलकती थीं। उन्होंने कहा कि झुमोर और चाय बागानों की संस्कृति से लोगों का विशेष संबंध है, ठीक उसी तरह। इतनी बड़ी संख्या में कलाकारों द्वारा झूमर नृत्य करने से आज एक रिकॉर्ड बनेगा, उन्होंने कहा। 2022 में असम में 11,000 कलाकारों द्वारा बिहू नृत्य प्रस्तुत करने का रिकॉर्ड बनाया। प्रधानमंत्री ने कहा कि वे इसे एक अविस्मरणीय स्मृति के रूप में याद करेंगे और उन्होंने कहा कि वे इसी तरह के उत्कृष्ट प्रदर्शन की उम्मीद करेंगे। उन्होंने असम सरकार और राज्य के मुख्यमंत्री को शानदार सांस्कृतिक कार्यक्रम की व्यवस्था के लिए बधाई दी। उनका कहना था कि आज असम के लिए गर्व का दिन है, जिसमें आदिवासी लोग और चाय से जुड़े समुदाय समारोह में भाग ले रहे हैं। इस खास दिन पर सभी को शुभकामनाएं दीं।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि ऐसे बड़े आयोजन असम का गौरव और भारत की विविधता को दर्शाते हैं। उनका कहना था कि एक समय था जब पूर्वोत्तर और असम को विकास और संस्कृति के मामले में नजरअंदाज किया गया था। उन्हें बताया गया कि वे अब पूर्वोत्तर संस्कृति का ब्रांड एंबेसडर हैं। उन्होंने कहा कि असम के काजीरंगा में रहकर दुनिया को बताने वाले पहले प्रधानमंत्री हैं। उन्हें यह भी बताया गया कि कुछ महीने पहले असमिया को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया गया था, जो असम के लोगों ने दशकों से इंतजार किया था। उनका कहना था कि उनकी सरकार के प्रयासों की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है कि चराई देउ मोइदम को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है।
Delighted to be amongst the wonderful people of Assam at the vibrant Jhumoir Binandini programme. Grateful for the warmth and affection. https://t.co/fER1Jfg2cf
— Narendra Modi (@narendramodi) February 24, 2025
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने लाचित बोरफुकन के बारे में बात की, जो असम की संस्कृति और पहचान को मुगलों से बचाया था। वे लाचित बोरफुकन की 400वीं जयंती पर चर्चा करते हुए कहा कि उनकी झांकी गणतंत्र दिवस परेड में भी थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि एक 125 फीट ऊंची लाचित बोरफुकन की प्रतिमा असम में स्थापित की गई है। उन्होंने जनजातीय गौरव दिवस की शुरुआत का भी उल्लेख किया, जो आदिवासी समाज की विरासत को याद दिलाता है। उनका कहना था कि देश भर में आदिवासी संग्रहालय बनाए जा रहे हैं ताकि आदिवासी वीरों का योगदान स्मरण किया जा सके।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने असम के विकास और उसकी ‘चाय जनजाति’ की सेवा करने की बात कहते हुए बोनस की घोषणा की। उन्होंने चाय बागानों में काम करने वाली लगभग 1.5 लाख महिलाओं को दी जा रही सहायता पर जोर दिया, जिन्हें गर्भावस्था के दौरान उन्हें 15,000 रुपये मिलते हैं। उनका कहना था कि इसके अलावा, असम सरकार चाय बागानों में 350 से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को परिवारों के स्वास्थ्य के लिए खोल रही है। श्री मोदी ने कहा कि चाय जनजाति के बच्चों के लिए सौ से अधिक आदर्श चाय बागान स्कूल खोले गए हैं और सौ और खोलने की योजना है। उन्होंने असम सरकार द्वारा स्वरोजगार के लिए 25,000 रुपये की सहायता और चाय जनजाति के युवाओं के लिए ओबीसी कोटे में 3% आरक्षण का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि चाय उद्योग और इसके कर्मचारियों के विकास से असम के समग्र विकास को गति मिलेगी और पूर्वोत्तर को नई उंचाइयां हासिल होंगी। उन्होंने सभी को उनके आगामी प्रदर्शन के लिए धन्यवाद दिया और शुभकामनाएं दीं।
असम के राज्यपाल श्री लक्ष्मण प्रसाद आचार्य, असम के मुख्यमंत्री श्री हिमंत बिस्वा सरमा, केंद्रीय मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, श्री सर्बानंद सोनोवाल, त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा और केंद्रीय राज्य मंत्री श्री पबित्र मार्गेरिटा इस कार्यक्रम में उपस्थित थे।
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