प्रोजेक्ट चीता की बड़ी सफलता-कूनो में 57 हुये चीते

भोपाल

मध्यप्रदेश का कूनो नेशनल पार्क अब चीतों का केवल आश्रय स्थल नहीं रहा, बल्कि एक सफल चीता प्रजनन केन्द्र के रूप में दुनिया भर में अलग पहचान बना चुका है। नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीते यहां की जलवायु और पारिस्थितिकी तंत्र में पूरी तरह से रच बस गये हैं। कूनो की धरती अब आये दिन नन्हे शावकों की किलकारियों से गूंज रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का लुप्त हो चुके चीतों के देश में फिर से बसाने का सपना ‘प्रोजेक्ट चीता’ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में केन्द्र-राज्य के विभागों के समन्वय और प्रबंधन से वन्य-जीव संरक्षण के क्षेत्र में नये इतिहास लिखे जाने के साथ साकार हो रहा है।

चुनौतियों पर विजय के बाद मिली ऐतिहासिक सफलता

प्रोजेक्ट चीता का प्रारंभिक चरण शुरुआती चुनौतियों से भरा हुआ था, लेकिन कूनो की आबोहवा और विभाग के विशेषज्ञों के कुशल प्रबंधन ने सभी चुनौतियों से पार पाते हुए वन्य-जीव संरक्षण की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लुप्त प्रजाति की पुनर्स्थापना का सफलतम पर्याय बना दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यहां की भौगोलिक परिस्थितियां और पर्याप्त शिकार चीतों के प्रजनन के लिए बेहद अनुकूल सिद्ध हुए हैं। मादा चीतों द्वारा लगातार शावकों को जन्म देना इस बात का प्रमाण है कि वे तनावमुक्त हैं और कूनो को अपना प्राकृतिक आवास मान चुकी हैं।

बढ़ता कुनबा : प्रोजेक्ट चीता की नई उड़ान

पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्ट

कूनो का ब्रीडिंग सेंटर बनना केवल पर्यावरणीय उपलब्धि नहीं, बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। चीतों की बढ़ती संख्या के साथ यहां वाइल्डलाइफ टूरिज्म की संभावनाएं कई गुना बढ़ गई हैं। इससे श्योपुर और आसपास के जिलों में रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं और स्थानीय युवाओं के लिए नई संभावनाएं खुल रही हैं।

प्रोजेक्ट चीता-एक ऐतिहासिक यात्रा

             17 सितंबर 2022: प्रधानमंत्री श्री मोदी ने नामीबिया से आए 8 चीतों को कूनो में छोड़ा— यह दुनिया का पहला अंतरमहाद्वीपीय बिग प्रेडेटर स्थानांतरण पुनर्स्थापना प्रोजेक्ट था।

नई पीढ़ी और भविष्य की दिशा

कूनो में अब दूसरी पीढ़ी के चीते भी विकसित हो रहे हैं। मुखी जैसी भारत में जन्मी मादा चीता का शावकों को जन्म देना पुनर्स्थापना प्रोजेक्ट में जैनेटिक ब्रीडिंग के रूप में मील का पत्थर माना जा रहा है। वन विभाग अब शावकों की पहचान नामों के बजाय कोड (जैसे KP-1, KP-2) से कर रहा है, ताकि उनकी वंशावली को वैज्ञानिक तरीके से ट्रैक किया जा सके।

आगे की योजना-दूसरा घर तैयार

कूनो पर बढ़ते दबाव को देखते हुए अब प्रदेश के गांधी सागर अभयारण्य को चीतों के दूसरे घर के रूप में विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। इससे प्रोजेक्ट चीता को और विस्तार मिलेगा और भारत में चीतों की स्थायी वापसी सुनिश्चित होगी।

कूनो नेशनल पार्क में चीतों की बढ़ती संख्या और सफल प्रजनन ने यह साबित कर दिया है कि भारत में चीतों की वापसी का सपना अब साकार हो रहा है। यह परियोजना न केवल वन्यजीव संरक्षण का उदाहरण बन रही है, बल्कि पर्यावरण, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था — तीनों क्षेत्रों में एक नई ऊर्जा का संचार कर रही है।

कूनो नेशनल पार्क : ‘प्रोजेक्ट चीता’ की विस्तृत टाइमलाइन

शुरुआत और ऐतिहासिक आगमन (2022)

विस्तार और पहली बड़ी सफलता (2023)

             मई–अगस्त 2023: संक्रमण व अन्य कारणों से कुछ चीतों और शावकों की मृत्यु हुई। इसके बाद सभी चीतों को स्वास्थ्य परीक्षण हेतु बोमामें रखा गया।

पुनर्वास और नई पीढ़ी का उदय (2024)

             जनवरी 2024: मादा चीता आशा ने 3 शावकों को जन्म दिया।

             इसके बाद ज्वालाने दोबारा 4 शावकों को जन्म देकर प्रजनन क्षमता साबित की।

             मार्च 2024: मादा चीता गामिनीने एक साथ 5 शावकों को जन्म देकर रिकॉर्ड बनाया।

नई उपलब्धियां और विस्तार (2025–2026)

             नवंबर 2025: भारत में जन्मी मादा चीता मुखी ने वयस्क होकर 5 शावकों को जन्म दिया — इसे ‘जेनेटिक मील का पत्थर’ माना गया।

पहचान और नामकरण की विशेष व्यवस्था

नामीबिया से आए प्रमुख चीते (2022)

दक्षिण अफ्रीका से आए चीते (2023)

भारत में जन्मी नई पीढ़ी

         मुखी: भारत में जन्मी पहली मादा चीता जिसने आगे शावकों को जन्म दिया

 

Exit mobile version