अंबाला
रेलवे में कर्मचारियों की कमी दूर करने और ट्रेनों का संचालन सुचारू रखने के लिए रेलवे बोर्ड ने बड़ा फैसला लिया है। बोर्ड ने रेलवे के ग्रुप सी कर्मचारियों को राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों और उनके अधीन आने वाले विभिन्न विभागों व संस्थानों में प्रतिनियुक्ति पर भेजने पर रोक लगा दी है।
इसका मतलब है कि अब रेलवे के ग्रुप सी कर्मचारी इन विभागों में दूसरे पदों पर काम करने के लिए नहीं जा सकेंगे। रेलवे बोर्ड ने इस संबंध में आदेश जारी किया है।
तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश
आदेश में सभी क्षेत्रीय रेलों के महाप्रबंधकों और रेलवे की उत्पादन इकाइयों को इसे तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। रेलवे में ग्रुप सी के कर्मचारी रोजमर्रा के कामकाज की रीढ़ माने जाते हैं।
ट्रेन चलाने से लेकर स्टेशन संचालन, पटरियों की देखरेख, सिग्नल व्यवस्था और कार्यालयों के कामकाज तक में इनकी अहम भूमिका होती है।
ऐसे में जब कर्मचारी प्रतिनियुक्ति पर दूसरे विभागों में चले जाते हैं तो रेलवे के अपने कामकाज के लिए कर्मचारियों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। रेलवे बोर्ड के इस फैसले का उद्देश्य अपने कर्मचारियों का इस्तेमाल रेलवे के कामकाज में ही करना और जरूरी पदों पर कर्मचारियों की उपलब्धता बनाए रखना है।
इससे ट्रेन संचालन, पटरियों और सिग्नल व्यवस्था की देखरेख जैसे जरूरी कामों पर ध्यान केंद्रित किया जा सकेगा।
किन विभागों में जाने पर लगी रोक
नए आदेश के अनुसार ग्रुप सी के कर्मचारी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के विभागों के अलावा उनके अधीन आने वाले सार्वजनिक उपक्रमों, स्वायत्त संस्थाओं, वैधानिक निकायों, विश्वविद्यालयों और स्थानीय निकायों में प्रतिनियुक्ति पर नहीं जा सकेंगे।
इन संस्थानों में दूसरे विभाग के लिए बनाए गए पदों पर रेलवे कर्मचारियों की तैनाती का रास्ता बंद कर दिया गया है। पहले क्या होता था प्रतिनियुक्ति के तहत किसी कर्मचारी को कुछ समय के लिए उसके मूल विभाग से दूसरे विभाग या संस्थान में काम करने के लिए भेजा जाता है।
संबंधित संस्थानों में नहीं जा सकेंगे कर्मचारी
इस दौरान कर्मचारी का मूल विभाग रेलवे ही रहता है, लेकिन वह तय अवधि तक दूसरे संस्थान में काम करता है। रेलवे बोर्ड के नए फैसले से राज्य सरकारों और अन्य संबंधित संस्थानों में ग्रुप सी कर्मचारियों की इस तरह तैनाती पर रोक लग गई है। रेलवे बोर्ड ने यह कदम केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के 24 सितंबर 2024 के कार्यालय ज्ञापन के संदर्भ में उठाया है।
अब क्षेत्रीय रेलों को नए आदेश के अनुसार प्रतिनियुक्ति से जुड़े मामलों में कार्रवाई करनी होगी। रेलवे के लिए क्यों अहम है फैसला इस फैसले से रेलवे अपने उपलब्ध कर्मचारियों को अपने ही विभाग में तैनात रखने पर जोर दे सकेगा।
खासकर उन पदों पर कर्मचारियों की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिल सकती है, जिनका सीधा संबंध ट्रेन संचालन, सुरक्षा और रखरखाव से है। हालांकि, इस आदेश से रेलवे में कर्मचारियों की वास्तविक कमी कितनी दूर होगी, यह उपलब्ध पदों और तैनात कर्मचारियों की संख्या पर निर्भर करेगा।

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