रिश्वत-म्यूटेशन की शिकायतों से घिरे अंचल, लोकायुक्त के पास हर माह पहुंच रहीं 15-20 शिकायतें

रांची
झारखंड में अंचलों में सर्वाधिक भ्रष्टाचार की शिकायतें आ रही हैं। भ्रष्टाचार के विरुद्ध झारखंड की सशक्त एजेंसी लोकायुक्त व भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के पास अंचलों में भ्रष्टाचार की शिकायतों की भरमार है।

रिश्वत मांगने, बिना रिश्वत के म्यूटेशन नहीं करने, बेवजह लोगों को परेशान करने के मामले पहुंच रहे हैं। यही वजह है कि छोटे-मोटे मामलों में भी अंचल में काम नहीं होने पर वरीय पदाधिकारियों के पास उनकी शिकायतें पहुंच रहीं हैं।

अभी दो दिन पहले ही भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में ही झारखंड हाई कोर्ट के आदेश पर एसीबी ने प्राथमिकी दर्ज कर नामकुम अंचल के तत्कालीन अंचल निरीक्षक (सीआई) मनोज कुमार दीक्षित तथा तत्कालीन कार्यालय लिपिक दीपक कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। इतना ही नहीं, तत्कालीन अंचलाधिकारी डाॅ. श्वेता वर्मा व अन्य आरोपितों के विरुद्ध जांच तेज है।

गत वर्ष रांची के चुटिया थाने में तीन अंचलाधिकारी रवींद्र कुमार, अरविंद कुमार ओझा व सुमन कुमार सौरभ के अलावा अंचल निरीक्षक कमलकांत वर्मा, अनिल कुमार गुप्ता व राजस्व कर्मचारी सुनील मिंज व मनोरथ भगत के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पूरा मामला भ्रष्टाचार से जुड़ा था।

लोकायुक्त के यहां सर्वाधिक शिकायतें अंचलों से संबंधित
इसी वर्ष अप्रैल महीने में लोकायुक्त जस्टिस अमिताभ कुमार गुप्ता ने पदभार ग्रहण किया है। उनके पदभार ग्रहण के बाद से भ्रष्टाचार के विरुद्ध लगातार शिकायतें लोकायुक्त कार्यालय में पहुंच रहीं हैं। प्रत्येक माह करीब 15 से 20 शिकायतें ऐसी हैं, जो सिर्फ जमीन से संबंधित हैं और अंचलों में भ्रष्टाचार से जुड़ी हैं।

कुछ तो ऐसी शिकायतें हैं, जिनमें आवेदक का कहना है कि वह जिस जमीन पर घर बनाकर रह रहा है, उसके म्यूटेशन आवेदन को अंचल ने यह लिखकर खारिज कर दिया कि आवेदक का जमीन पर दखल कब्जा नहीं है।

मतलब रिश्वत नहीं देने पर राजस्व कर्मचारी ने बिना भौतिक सत्यापन के फर्जी रिपोर्ट दी, जिसके आधार पर अंचलाधिकारी ने म्यूटेशन को अस्वीकृत कर दिया। लोकायुक्त व एसीबी में ऐसी शिकायतों की भरमार है।

अंचलों में भ्रष्टाचार के कुछ प्रमुख मामले

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