धनबाद.
जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग में रोपवे में आयी खराबी से तकरीबन 300 सैलानी घंटों हवा में लटके रहे थे। पिछले माह हुई घटना से लोगों में रोपवे की सवारी को लेकर डर बने रहने की संभावना थी। उस डर को केंद्रीय खनन एवं ईंधन अनुसंधान संस्थान-सिंफर(CIMFR) के विज्ञानी ने दूर करने की कोशिश की है।
सिंफर के रोपवे टेस्टिंग विभाग के वरिष्ठ विज्ञानी डा. पीके मिश्रा ने देशभर के प्रमुख रोपवे का परीक्षण किया है। शेष बचे रोपवे की टेस्टिंग की प्रक्रिया अब भी जारी है।
इन स्थानों की कर चुके रोप टेस्टिंग
मैहर रोपवे, चंडी देवी रोपवे, नैनीताल रोपवे, उदयपुर के नीमच माता मंदिर रोपवे, दार्जिलिंग रोपवे, मध्यप्रदेश के देवास में चामुंडा देवी रोपवे, चित्रकूट के हनुमान धारा रोपवे, मनाली, धर्मशाला और मंडी रोपवे के साथ मध्यप्रदेश के भेड़ाघाट रोपवे की टेस्टिंग हो चुकी है। इनमें सबसे अधिक भीड़ मैहर रोपवे में होती है। इसे ध्यान में रख कर रोप परीक्षण किया गया है। हालांकि रोप की स्थिति सही पाई गई है। पिछले साल वैष्णोदेवी रोपवे के रोप का भी परीक्षण कर चुके हैं।
वैष्णोदेवी रोपवे की फिर से परीक्षण को जाएंगे। रोप टेस्टिंग कर चुके सिंफर विज्ञानी ने ज्यादातर रोप की स्थिति सही पाया है। हालांकि इसके बावजूद रोपवे संचालक एजेंसी को सुरक्षा मानकों का ध्यान रख कर हर दिन क्लोज मानीटरिंग का सुझाव दिया है। रोपवे के साथ अन्य संवेदनशील स्थान व उपकरणों की नियमित जांच और आंशिक गड़बड़ी होने पर भी तत्काल सेवा रोक कर उसे ठीक करने की सिफारिश की है।
क्या कहते हैं विज्ञानी
डा. पीके मिश्रा ने बताया कि सिंफर रोप टेस्टिंग करता है। बीआइएस मानक के अनुसार उसके डायमीटर और घिसने वाली जगह का अध्ययन किया जाता है। डायमीटर में घिसाव या क्षरण आया हो तो बदलने का परामर्श दिया जाता है। अब तक जितने भी रोपवे टेस्टिंग की गई है उन्हें सुरक्षा मानकों की विशेष और हर दिन निगरानी का सुझाव दिया गया है।

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