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जालंधर में ‘प्रांतीय सप्तशक्ति संगम’ का शंखनाद: डॉ. मधुश्री सावजी ने मातृशक्ति को सिखाए सफलता के 7 सूत्र; संस्कारों की प्रथम गुरु है मां

जालंधर में आयोजित प्रांतीय सप्तशक्ति संगम में डॉ. मधुश्री सावजी ने नारी के सात गुणों और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका पर प्रकाश डाला। देशभर के 22,000 संगमों की सफलता पर चर्चा।

जालंधर: नारी शक्ति, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ जालंधर में ‘प्रांतीय सप्तशक्ति संगम’ का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित डॉ. मधुश्री संजीव सावजी (अखिल भारतीय मंत्री, महाराष्ट्र) ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में नारी को समाज की धुरी बताते हुए भारतीय संस्कृति के मूल तत्वों को जीवन में उतारने का आह्वान किया।

सप्तशक्ति के सात गुण: नारी की वास्तविक शक्ति डॉ. सावजी ने सप्तशक्ति के सात विशिष्ट गुणों— श्री, कीर्ति, वाक्, स्मृति, मेधा, धृति एवं क्षमा —का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि इन गुणों को धारण करने से ही नारी अपनी वास्तविक शक्ति को पहचान सकती है। उन्होंने विज्ञान और अध्यात्म को एक-दूसरे का पूरक बताते हुए कहा कि आदिशक्ति के बिना सृष्टि की कल्पना अधूरी है। उनके अनुसार, प्राचीन काल की तरह आज भी नारी को परिवार और समाज में समरसता स्थापित करने के लिए आगे आना होगा।

देशभर में 27 लाख महिलाओं की सहभागिता विशिष्ट अतिथि श्रीमती गीता आहूजा (उत्तर क्षेत्रीय संयोजिका) ने जानकारी दी कि नारी जागरण का यह अभियान अब एक विशाल आंदोलन बन चुका है। देशभर में अब तक 22,000 से अधिक संगम आयोजित हो चुके हैं, जिनमें लगभग 27 लाख महिलाओं ने भाग लिया है। अकेले पंजाब में 356 संगमों के माध्यम से 26,000 महिलाओं में शक्ति बोध जागृत किया गया है। उन्होंने अहिल्या और गार्गी जैसी महान विभूतियों के उदाहरण देते हुए नारी के पुत्री से परमेश्वर तक के विस्तार को समझाया।

सांस्कृतिक प्रस्तुति और ‘गीता सारथी’ का उपहार कार्यक्रम के दौरान सर्वहितकारी केशव विद्या निकेतन की आचार्य बहनों ने “हम ही मातृशक्ति हैं” गीत की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। अतिथियों को उपहार स्वरूप हिंदी काव्य गीता सारथी ‘ले चल निज धाम की ओर’ भेंट की गई, जिसकी सराहना करते हुए मुख्य अतिथि ने इसे बच्चों में संस्कार पुष्टि का उत्कृष्ट माध्यम बताया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत वंदे मातरम् और सामूहिक भोज के साथ हुआ।

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