नई दिल्ली/अमरावती: आंध्र प्रदेश के बहुचर्चित ‘ड्राइवर सुब्रमण्यम हत्याकांड’ में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि राज्य में ‘सत्ता और पुलिस के बीच स्पष्ट गठजोड़’ (Hobnobbing) दिखाई दे रहा है। जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने काकीनाडा मामले के ट्रायल को 30 नवंबर तक हर हाल में पूरा करने का अंतिम आदेश जारी किया है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला मई 2022 का है, जब वाईएसआरसीपी (YSRCP) के एमएलसी अनंथा सत्य उदया भास्कर राव पर आरोप लगा कि उन्होंने अपने पूर्व ड्राइवर वीधी सुब्रमण्यम की हत्या कर दी। पैसों के विवाद में हुई इस हत्या के बाद आरोपी एमएलसी ने खुद मृतक के शव को उसके घर पहुँचाया था और इसे एक दुर्घटना बताने की कोशिश की थी। मृतक दलित समुदाय से था, जिसके बाद पुलिस ने हत्या और SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था।
“हॉबनॉबिंग” और जांच पर सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए। पीठ ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि जांच एजेंसियां आरोपी को बचाने या मामले को लटकाने की कोशिश कर रही हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि न्याय की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की देरी या पारदर्शिता की कमी को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
न्यायिक घटनाक्रम:
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मई 2022: एमएलसी राव की गिरफ्तारी हुई (उस समय राज्य में YSRCP की सरकार थी)।
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सितंबर 2022: आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने उनकी ‘डिफॉल्ट बेल’ याचिका खारिज कर दी।
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दिसंबर 2022: सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को अंतरिम जमानत दी, यह कहते हुए कि किसी को अनिश्चितकाल तक जेल में नहीं रखा जा सकता, लेकिन ट्रायल तेज़ी से चलना चाहिए।
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ताजा आदेश: अब ट्रायल को 30 नवंबर तक समाप्त करने की अंतिम समय सीमा (Deadline) तय कर दी गई है।
इस आदेश के बाद अब जिला अदालत को निर्धारित समय के भीतर गवाहों के बयान और बहस पूरी कर फैसला सुनाना होगा।



