बठिंडा.
पंजाब के सबसे बड़े सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में शामिल AIIMS बठिंडा में गुरुवार सुबह तकनीकी गड़बड़ी के कारण पूरा डिजिटल सिस्टम अचानक ठप पड़ गया। सर्वर बंद होने से ओपीडी पर्चियां बनाने, मरीजों के पंजीकरण, जांच संबंधी प्रक्रियाओं और ब्लड सैंपल लेने जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं।
इसके चलते दूर-दराज के जिलों और पड़ोसी राज्यों से इलाज के लिए पहुंचे हजारों मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। जानकारी के अनुसार, बुधवार देर रात यूपीएस (अनइंटरप्टेड पावर सप्लाई) में तकनीकी खराबी आ गई, जिससे सर्वर को मिलने वाली बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। इसके बाद अस्पताल का केंद्रीय कंप्यूटर नेटवर्क काम करना बंद कर गया और लगभग पूरा डिजिटल सिस्टम ठप हो गया।
सुबह से लगी लंबी कतारें
गुरुवार सुबह जैसे ही मरीज इलाज और जांच के लिए AIIMS पहुंचे तो उन्हें पता चला कि कंप्यूटर सिस्टम बंद होने के कारण पर्चियां नहीं बन पा रही हैं। OPD के बाहर लंबी कतारें लग गईं और मरीज घंटों अपनी बारी का इंतजार करते रहे। कई बुजुर्ग, महिलाएं और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीज परेशान होकर इधर-उधर भटकते नजर आए। सबसे ज्यादा परेशानी उन मरीजों को हुई जो सुबह खाली पेट ब्लड टेस्ट कराने पहुंचे थे। ब्लड सैंपल लेने की प्रक्रिया प्रभावित होने से उन्हें लंबे समय तक भूखे-प्यासे इंतजार करना पड़ा। कई मरीजों और उनके परिजनों ने अव्यवस्था को लेकर नाराजगी भी जाहिर की। सूत्रों के मुताबिक, AIIMS बठिंडा में यह पहला मौका है जब केंद्रीय सर्वर प्रभावित होने से लगभग पूरा डिजिटल सिस्टम ही ठप पड़ गया हो।
अस्पताल की अधिकांश सेवाएं ऑनलाइन प्रणाली पर आधारित होने के कारण एक तकनीकी खराबी ने पूरे कामकाज को प्रभावित कर दिया। घटना के बाद अस्पताल की तकनीकी टीमें सर्वर को दोबारा चालू करने और सिस्टम को बहाल करने में जुटी रहीं, लेकिन कई घंटों तक सामान्य व्यवस्था बहाल नहीं हो सकी। इस घटना ने AIIMS की बैकअप व्यवस्था और आपातकालीन प्रबंधन पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि देश के प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों में इस प्रकार की स्थिति से निपटने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था का मजबूत होना बेहद जरूरी है, ताकि किसी तकनीकी खराबी का खामियाजा मरीजों को न भुगतना पड़े।
हैरानी की बात यह रही कि हजारों मरीजों की परेशानी के बावजूद अस्पताल प्रशासन की ओर से देर शाम तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया। अधिकारियों ने मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। ऐसे में मरीजों और उनके परिजनों के बीच यह सवाल चर्चा का विषय बना रहा कि यदि भविष्य में इससे भी बड़ा तकनीकी संकट पैदा हो जाए तो उससे निपटने के लिए संस्थान के पास क्या वैकल्पिक व्यवस्था मौजूद है।

बिहार को मिलेगी बड़ी सड़क परियोजना, अरवल-औरंगाबाद में बनेंगे बाईपास; यात्रा होगी तेज
एक ही परिवार की दो बहुओं में चुनावी जंग, भाजपा-कांग्रेस के टिकट पर आमने-सामने होंगी जेठानी-देवरानी
हरीश द्विवेदी के गांव पहुंचे मुख्यमंत्री, दिवंगत माता को दी श्रद्धांजलि
झारखंड के किसानों के लिए मौका! कृषि उपकरण बैंक बनाने पर मिलेंगे 8 लाख रुपये तक, जानें पूरी योजना