भोपाल
मध्य प्रदेश में नए वित्तीय वर्ष यानी 1 अप्रैल से पहले सभी शराब दुकानों को नीलाम करने की चुनौती से जूझ रहे आबकारी विभाग ने अपने नियमों में बड़ा बदलाव किया है। भारी-भरकम ग्रुप में दुकानें न बिकने के कारण अब सरकार 'सिंगल शॉप' (एकल दुकान) मॉडल पर उतर आई है। यानी अब कोई भी छोटा ठेकेदार केवल एक दुकान के लिए भी बोली लगा सकेगा।
भोपाल और जबलपुर जैसे बड़े शहरों में ठेकेदारों की बेरुखी ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है, जिसके बाद बेस प्राइज (आरक्षित मूल्य) में भी 10% की कटौती कर दी गई है।
क्या है सरकार की मजबूरी?
शुरुआती राउंड में विभाग ने पिछले साल की तुलना में बेस प्राइज 20% बढ़ाकर रखा था, लेकिन ठेकेदारों ने इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई। आठवें राउंड की बिडिंग तक केवल 60% दुकानें ही नीलाम हो सकी हैं। भोपाल, जबलपुर, रतलाम, कटनी, शाजापुर, आलीराजपुर, दमोह, झाबुआ और नीमच जैसे जिलों में बड़ी संख्या में दुकानें अब भी नहीं बिकी हैं। सरकार को इस साल शराब से 19,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का राजस्व जुटाना है, जो इस धीमी रफ्तार से खतरे में नजर आ रहा है।
ऐसे समझें पूरा खेल: क्यों बदला नियम?
पहले दुकानों को बड़े समूहों में नीलाम किया जा रहा था, जिससे छोटे ठेकेदार बाहर हो गए थे और बड़े सिंडिकेट मनमानी कीमत मांग रहे थे। अब एक दुकान-एक बोली के नियम से बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। विभाग को उम्मीद है कि इस लचीलेपन से बचे हुए 40% ठेके भी 31 मार्च की रात तक उठ जाएंगे।
एक्सपर्ट की राय क्या है?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ सालों में शराब की खपत और ठेकेदारों के मुनाफे के गणित में अंतर आया है। सरकार का 20% इजाफा ठेकेदारों को भारी लग रहा था। अब 10% की कटौती और सिंगल शॉप मॉडल ही एकमात्र रास्ता बचा था ताकि 1 अप्रैल से दुकानें बंद न रहें।

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