चंडीगढ़.
पंजाब सरकार सड़क हादसों में जान गंवाने वाले शिक्षकों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने के लिए नई योजना बनाने पर विचार कर रही है। पंजाब विधानसभा में इस विषय पर चर्चा के दौरान शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि सरकार ऐसी रणनीति तैयार कर रही है, जिसके तहत दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले शिक्षकों के परिवारों को करीब एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जा सके।
विधानसभा में यह मुद्दा शिरोमणि अकाली दल के विधायक मनप्रीत सिंह अयाली ने उठाया। उन्होंने ब्लॉक समिति चुनावों के दौरान सड़क हादसों में मारे गए दो शिक्षकों का मामला सदन में रखा और सरकार से उनके परिवारों के लिए विशेष सहायता की मांग की। शिक्षा मंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि ब्लॉक समिति चुनावों के दौरान जिन दो शिक्षकों की सड़क दुर्घटनाओं में मौत हुई थी, उस मामले में विभाग की ओर से जो भी आर्थिक सहायता दी जानी है, वह नियमों के अनुसार दी जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपनी ओर से दोनों परिवारों को दस-दस लाख रुपये की सहायता पहले ही प्रदान की है।
उन्होंने कहा कि मृतक शिक्षकों के परिवार के सदस्यों को नौकरी देने का मामला भी सरकार के विचाराधीन है। यह नियुक्ति पर्सोनल विभाग की गाइडलाइन के अनुसार की जाएगी। इस पर विधायक मनप्रीत अयाली ने कहा कि जिन शिक्षकों की मौत हुई है, उनके परिवार की स्थिति बेहद कठिन है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को ऐसे मामलों में परिवारों को दो करोड़ रुपये तक की सहायता देने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या सरकार के पास ऐसी कोई योजना है जिससे भविष्य में ऐसे मामलों में बेहतर आर्थिक सहायता दी जा सके।
सरकार आर्थिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर कर रही काम
इस पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षा विभाग बहुत बड़ा है और बड़ी संख्या में कर्मचारी विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हैं। ऐसे में सरकार इस विषय पर गंभीरता से विचार कर रही है। उन्होंने बताया कि सरकार बैंकों के साथ बातचीत कर रही है, ताकि एक ऐसी व्यवस्था बनाई जा सके जिसके तहत सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले शिक्षकों के परिवारों को एक करोड़ रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में राज्य का बजट पेश किया गया है और सरकार कर्मचारियों की सुरक्षा तथा उनके परिवारों की आर्थिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर लगातार काम कर रही है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी कर्मचारी की आकस्मिक मृत्यु के बाद उसके परिवार को आर्थिक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।

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