रेवाड़ी
भारत की गौरवशाली बेटी 48 वर्षीय डॉ. आशा रेवाड़ी के पुलिस लाइन में रहती हैं l डॉ. आशा के पति अजय सिंह रेवाड़ी में हरियाणा पुलिस में सब इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। आशा के दो बच्चे हैं एक बेटी (डॉक्टर)और एक बेटा (इंजीनियर) ने एक बार फिर देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करते हुए एक उल्लेखनीय पर्वतारोहण उपलब्धि हासिल की है।
उन्होंने 21 अगस्त 2026 को यूरोप की सर्वोच्च चोटी माउंट एल्ब्रुस का सफल आरोहण किया और इसके बाद अपने अभियान को लगातार जारी रखते हुए 29 अगस्त 2026 को अफ्रीका की सर्वोच्च चोटी माउंट किलिमंजारो को सफलतापूर्वक फतह किया।
दोनों चोटियों को प्रभावी अभियान अवधि के केवल छह दिनों में फतह किया गया, जबकि दोनों समिट डेट के बीच कैलेंडर के अनुसार आठ दिन का अंतर है, जिसमें यात्रा एवं ट्रांजिट समय शामिल है। यह उपलब्धि उनकी असाधारण सहनशक्ति, दृढ़ संकल्प, शारीरिक फिटनेस, मानसिक मजबूती और अनुशासन का प्रमाण है।
माउंट एल्ब्रुस यूरोप की सर्वोच्च चोटी पर की फतेह
21 अगस्त 2026 को सुबह 09:07 बजे, डॉ. आशा ने 5,642 मीटर (18,510 फीट) ऊंची माउंट एल्ब्रुस की चोटी पर सफलतापूर्वक पहुंचकर यूरोप की सर्वोच्च चोटी को फतह किया।
वह अपने साथ भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा लेकर शिखर तक पहुंचीं। इसके साथ ही उन्होंने “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” और “महिला सशक्तिकरण” के संदेश एवं लोगो भी शिखर तक पहुंचाए।
उनका यह आरोहण केवल पर्वतारोहण की उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की राष्ट्रीय भावना और महिलाओं की शिक्षा, सशक्तिकरण एवं प्रगति का संदेश दुनिया की ऊंची चोटियों तक पहुंचाने का प्रतीक भी बना।
माउंट किलिमंजारो को भी किया फतेह
माउंट एल्ब्रुस की सफल चढ़ाई के बाद डॉ. आशा ने अपने महत्वाकांक्षी अभियान को जारी रखा और तंजानिया स्थित माउंट किलिमंजारो की ओर प्रस्थान किया।
29 अगस्त 2026 को सुबह 05:31 बजे, उन्होंने 5,895 मीटर (19,341 फीट) ऊंची उहुरू पीक पर सफलतापूर्वक पहुंचकर अफ्रीका की सर्वोच्च चोटी को फतह किया।
इस प्रकार डॉ. आशा ने यूरोप और अफ्रीका की सर्वोच्च चोटियों को लगातार एक ही अभियान-यात्रा में सफलतापूर्वक फतह किया। जिसमें अंतरराष्ट्रीय यात्रा और अभियान संबंधी व्यवस्थाएं शामिल थीं, जबकि प्रभावी अभियान अवधि छह दिन रही।माउंट एल्ब्रुस और माउंट किलिमंजारो की लगातार सफल चढ़ाई उनकी असाधारण सहनशक्ति, दृढ़ इच्छाशक्ति, अनुशासन, शारीरिक क्षमता और प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
माउंट एवरेस्ट से यूरोप और अफ्रीका की चोटियों तक
डॉ. आशा ने वर्ष 2017 में 39 वर्ष की आयु में अपने पहले ही प्रयास में चीन/तिब्बत की ओर से माउंट एवरेस्ट का सफल आरोहण किया था। उन्होंने भारत और विश्व की पहली नर्सिंग ऑफिसर के रूप में माउंट एवरेस्ट फतह करने की पहचान का दावा किया है और उनकी इस उपलब्धि से जुड़े रिकॉर्ड दावे भी किए गए हैं।
एक सरकारी नर्सिंग ऑफिसर के रूप में मरीजों की सेवा करने से लेकर माउंट एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचने और उसके बाद माउंट एल्ब्रुस तथा माउंट किलिमंजारो को फतह करने तक की उनकी यात्रा जनसेवा, साहस, अनुशासन और पर्वतारोहण उत्कृष्टता का अद्भुत उदाहरण है।
27 वर्षों की सरकारी सेवा
डॉ. आशा पिछले 27 वर्षों से राजस्थान सरकार में नर्सिंग ऑफिसर के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं। स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के साथ-साथ उन्होंने पर्वतारोहण और साहसिक अभियानों के अपने जुनून को भी निरंतर आगे बढ़ाया।
उनकी यात्रा यह शक्तिशाली संदेश देती है कि अनुशासन, समर्पण और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ पेशेवर जिम्मेदारियों के साथ अपने सपनों को भी पूरा किया जा सकता है।
सेवन समिट्स मिशन 2026–27 की ओर
माउंट एवरेस्ट, माउंट एल्ब्रुस और माउंट किलिमंजारो को सफलतापूर्वक फतह करने के बाद डॉ. आशा अब अपने महत्वाकांक्षी “सेवन समिट्स मिशन 2026–27” की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।उनका अंतिम लक्ष्य सातों महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों पर सफलतापूर्वक पहुंचना और एक भारतीय महिला पर्वतारोही एवं स्वास्थ्य सेवा कर्मी के रूप में एक प्रेरणादायक अंतरराष्ट्रीय उदाहरण स्थापित करना है।
एयर पिस्टल शूटिंग में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन
पर्वतारोहण के साथ-साथ डॉ. आशा एक उत्कृष्ट एयर पिस्टल शूटर भी हैं। वह 10 मीटर, 25 मीटर और 50 मीटर की स्पर्धाओं में भाग लेती हैं।वर्ष 2025 में उन्होंने मास्टर्स महिला वर्ग में 4 स्वर्ण और 3 कांस्य पदक जीते। यह उपलब्धि उनकी फिटनेस, एकाग्रता, सटीकता, अनुशासन और प्रतिस्पर्धात्मक उत्कृष्टता को दर्शाती है।
शिखर से भी आगे — एक प्रेरणादायक संदेश
डॉ. आशा की यात्रा राजस्थान के एक छोटे से गांव से शुरू होकर दुनिया की सर्वोच्च चोटियों तक पहुंची है। यह केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि भारत की महिलाओं और युवाओं के लिए एक प्रेरणादायक संदेश है कि साहस, दृढ़ संकल्प, अनुशासन और निरंतर प्रयास से बड़े से बड़ा सपना भी साकार किया जा सकता है।
भारतीय तिरंगा, महिला सशक्तिकरण तथा “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” का संदेश पर्वतों की चोटियों तक पहुंचाकर डॉ. आशा ने पर्वतारोहण को समाज में जागरूकता और प्रेरणा का माध्यम बनाया है।

परिवहन मंत्री केदार कश्यप ने भानुप्रतापपुर-कोरर और भानुप्रतापपुर-अंतागढ़ मार्ग पर बसों को दिखाई हरी झंडी
पारंपरिक वैद्यों का ज्ञान अमूल्य विरासत, आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षण जरूरी : वन मंत्री केदार कश्यप
लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जागरूक रहें युवा : राज्य मंत्री गौर
MP के शिवपुरी में परमाणु बिजलीघर की तैयारी, जमीनों की कीमतों में उछाल