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कपूरथला के शाहवाला में सीवरेज प्लांट की पाइपलाइन पर ग्रामीणों का विरोध, भारी पुलिस तैनात

जिले के गांव शाहवाला अंदरीसा में बुधवार को उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब ग्रामीणों ने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से ट्रीट किए गए पानी की आउटपुट पाइपलाइन बिछाने का कार्य रुकवा दिया। विरोध के मद्देनजर प्रशासन को भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा और पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया।

कपूरथला: जिले के गांव शाहवाला अंदरीसा में बुधवार को उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब ग्रामीणों ने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से ट्रीट किए गए पानी की आउटपुट पाइपलाइन बिछाने का कार्य रुकवा दिया। विरोध के मद्देनजर प्रशासन को भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा और पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया।

ग्रामीणों का आरोप है कि शहर के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाले पानी को पवित्र काली बेईं में छोड़े जाने की तैयारी की जा रही है। उनका कहना है कि इससे न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचेगा, बल्कि धार्मिक भावनाएं भी आहत होंगी। प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि पाइपलाइन उनकी निजी जमीन से जबरन बिछाई जा रही है, जबकि पहले प्रशासन ने वैकल्पिक मार्ग अपनाने का आश्वासन दिया था।

वादाखिलाफी का आरोप, अनिश्चितकालीन धरना

धरने पर बैठे ग्रामीणों ने प्रशासन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि अधिकारियों ने भरोसा दिलाया था कि न तो नदी को नुकसान होगा और न ही किसी निजी भूमि का उपयोग किया जाएगा। इसके बावजूद बिना सहमति के कार्य शुरू कर दिया गया। विरोधस्वरूप ग्रामीणों ने मौके पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया और पाइपलाइन बिछाने में लगी मशीनों को बंद करवा दिया, जिससे काम पूरी तरह ठप हो गया।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने लगभग 200 से 250 पुलिस कर्मियों को मौके पर तैनात किया। क्षेत्र में नाकाबंदी कर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

एसपी (डी) प्रभजोत सिंह विर्क ने बताया कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त बल मौजूद है।

विभाग ने आरोपों को किया खारिज

वहीं, सीवरेज एवं वाटर सप्लाई विभाग के अधिकारी अरविंद मेहता ने ग्रामीणों के आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाइपलाइन सरकारी जमीन से बिछाई जा रही है और किसी भी निजी भूमि को नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रीट किया गया पानी निर्धारित पर्यावरण मानकों के अनुरूप ही छोड़ा जाएगा।

अधिकारियों का दावा है कि परियोजना का उद्देश्य शहरी सीवरेज प्रबंधन को बेहतर बनाना और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करना है। विभाग के अनुसार, तकनीकी मानकों और पर्यावरणीय दिशानिर्देशों का पूरी तरह पालन किया जा रहा है।

बातचीत के बाद स्थिति सामान्य

देर शाम प्रशासन और ग्रामीण प्रतिनिधियों के बीच वार्ता हुई। एसपी (डी) के मुताबिक, सकारात्मक बातचीत के बाद स्थिति सामान्य हुई और पाइपलाइन का कार्य पुनः शुरू करवा दिया गया। हालांकि ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि वे प्रशासन से लिखित आश्वासन चाहते हैं, ताकि भविष्य में किसी तरह की आशंका न रहे।

फिलहाल क्षेत्र में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यदि उनकी मांगों को औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं किया गया, तो वे दोबारा आंदोलन शुरू कर सकते हैं।

यह मामला पर्यावरणीय संरक्षण, धार्मिक आस्था और विकास परियोजनाओं के बीच संतुलन की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

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