सूर्य को अर्घ्य देने का नियम, यहाँ देखे

By Neha

मान्यता है कि सूर्य को हर दिन अर्घ्य देने से भगवान भास्कर की कृपा मिलती है। धन वैभव और सम्मान मिलता है और कुंडली में सूर्य से जुड़े दोष भी दूर होते हैं.

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प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व ही स्नान कर शुद्ध हो जाएं।

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सूर्योदय होने पर भगवान भास्कर के सामने कुश आसन लगाएं।

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आसन पर खड़े होकर एक तांबे के पात्र में जल डालकर मिश्री, रोली चंदन, लाल पुष्प और अक्षत को मिलाएं। जैसे ही नारंगी किरणें दिखाई दें, दोनों हाथों से तांबे के पात्र से सूर्य को अर्घ्य दें।

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सूर्य को अर्घ्य देते समय इसका ध्यान रखें कि जल धारा आसन पर गिरे और न की जमीन पर।

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जलधारा जमीन पर गिरने से जल में समाहित ऊर्जा धरती में चली जाएगी और अर्घ्य का संपूर्ण लाभ आपको नहीं मिल पाएगा।

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इसी के साथ अर्घ्य देते समय ऊँ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजोराशे जगत्पते, अनुकंपये माम भक्त्या गृहणार्घ्यं दिवाकरः मंत्र का 11 बार जपें।

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इसके बाद ऊं ह्रीं ह्रीं सूर्याय, सहस्त्र किरणाय मनोवांछित फलं देहि देहि स्वाहाः मंत्र पढ़ें।

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इसके बाद सीधे हाथ की अंजुलि में जल लेकर अपने चारों ओर छिड़कें और अपने स्थान पर तीन बार घूमें।

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 अब आसन उठाकर उस स्थान को नमन करें।

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सूर्य को अर्घ्य देते समय गुड़ चढ़ाना चाहिए। इससे सूर्यदेव की कृपा प्राप्त होती है।

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