पंजाबराज्य

PU चुनाव में ABVP की जीत के मायने क्या? पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले बदले सियासी समीकरण

चंडीगढ़.

पंजाब विधान सभा चुनाव से पहले पंजाब यूनिवर्सिटी छात्र संघ के हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की छात्र इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने लगातार दूसरी बार अपनी जीत का परचम लहराया है।

चुनाव भले ही छात्र संघ के हो लेकिन भाजपा ने विरोधी पार्टी कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की चिंताएं बढ़ा दी हैं। क्योंकि पंजाब यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव से पंजाब के युवा मतदाताओं के मूड का अंदाजा लगता है। यूनिवर्सिटी में करीब 65 फीसदी छात्र पंजाब के विभिन्न जिलों व विभिन्न वर्गों से जुड़े हुए हैं। एबीवीपी के अंकित बिढान ने अपने निकटम प्रतिद्वंद्वी आप के छात्र संघ एएसएपी के आदिल बराड़ को 506 वोटों से हराया। अंकित को 3149 तो आदिल को 2637 वोट मिले। जबकि एनएसयूआई के प्रत्याशी गुरमन सिद्धू को 2263 वोट मिले।

छात्र संघ चुनाव में भाजपा की जीत से पंजाब की सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी की चिंताएं इसलिए भी बढ़ी हैं क्योंकि 31 अगस्त को मतदान से ठीक एक दिन पहले एबीवीपी और शिरोमणि अकाली दल की इकाई सोई का गठबंधन हो गया था। पंजाब में भले ही भाजपा अपने दम पर 117 विधान सभा सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा कर रही हो लेकिन विपक्षी पार्टियां हमेशा ही इस आशंका में रहती हैं की चुनाव से पहले दोनों पार्टियों का गठबंधन संभव है।

युवा शक्ति पर अटूट विश्वास का प्रमाण –
""पंजाब यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में @ABVPVoice की शानदार जीत पर परिषद् के सभी कार्यकर्ताओं को हार्दिक बधाई। लगातार दूसरी बार मिली यह जीत युवा शक्ति के राष्ट्र प्रथम की विचारधारा पर अटूट विश्वास का प्रमाण है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि परिषद् के कार्यकर्ता स्वामी विवेकानंद जी के…""
— Amit Shah (@AmitShah)

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