योगी सरकार का वन्यजीवों पर बड़ा फोकस, संरक्षण योजनाओं को मिलेगी नई रफ्तार

लखनऊ
 प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण को दीर्घकालिक और स्थायी वित्तीय आधार देने की दिशा में प्रदेश सरकार समर्पित राज्य सेक्टर योजना लेकर आई है। अनुपूरक बजट में इस योजना के तहत सरकार ने 100 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है।

प्रस्तावित योजना का उद्देश्य संरक्षित क्षेत्रों और वन्यजीव गलियारों की सुरक्षा मजबूत करना, मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना, आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देना तथा टाइगर कंजर्वेशन प्लान सहित विभिन्न संरक्षण योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करना है। इससे प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण के लिए एक मजबूत और आत्मनिर्भर संस्थागत व्यवस्था विकसित होने की उम्मीद है।

अनुपूरक बजट में पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को कुल 373.91 करोड़ रुपये मिले हैं। इनमें सबसे अधिक 200 करोड़ रुपये सामाजिक वानिकी योजना में अतिरिक्त दिए गए हैं। इससे सरकार पौधारोपण का कार्य कराती है।

राज्य सेक्टर योजना के तहत संरक्षित क्षेत्रों की सीमा सुरक्षा, फेंसिंग, प्रवेश बिंदुओं, वाच टावरों और निगरानी तंत्र को मजबूत किया जाएगा। इसके साथ ही गश्त, त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली और फील्ड प्रबंधन को नियमित वित्तीय संसाधनों से सशक्त बनाया जाएगा, जिससे अवैध शिकार, अवैध कटान और अन्य वन अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण लगने की उम्मीद है।

वर्तमान में प्रोजेक्ट टाइगर हो या वन्यजीवों की अन्य योजनाएं सभी केंद्र सरकार के बजट पर निर्भर हैं। वहां से धनराशि विलंब से मिलने के कारण कई योजनाएं अटक जाती हैं। प्रोजेक्ट टाइगर में वाचरों को मानदेय तक नहीं मिल पाता है।

सभी को समय पर मानदेय मिल सके और योजनाएं न अटकें इसके लिए योगी सरकार ने राज्य सेक्टर से इस योजना को धनराशि देने का निर्णय लिया है। प्रदेश में मेरठ, पीलीभीत, महराजगंज और चित्रकूट में बने रेस्क्यू सेंटरों के संचालन के लिए सरकार ने दो करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। इससे यहां स्टाफ की नियुक्ति हो सकेगी।

इन प्रमुख योजनाओं के लिए मिली धनराशि

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