चुनाव से पहले पंजाब में बड़ा दांव, भगवंत मान सरकार ने बढ़ाई जनकल्याणकारी योजनाएं

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चंडीगढ़  : अगले साल होने वाले विधान सभा चुनावों से ठीक एक साल पहले पंजाब की सियासत इन दिनों एक नए मोड़ पर खड़ी है। चंडीगढ़ से लेकर दोआबा,माझा और मालवा में एक ही चर्चा है क्या राज्य में जनकल्याण की सबसे व्यापक तस्वीर उभर रही है? आम आदमी पार्टी की सरकार ने बीते समय में जिस तरह एक के बाद एक लोकहितकारी योजनाओं का ऐलान और जिस प्रकार उन्हें लागू किया है, उसने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में सरकार ने आम नागरिकों को सीधे राहत देने की नीति को अपनी पहचान बना लिया है। सबसे पहले 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली की सुविधा ने लाखों परिवारों का घरेलू बजट संतुलित किया। इसके साथ ही मुफ्त पानी और हर परिवार को 10 लाख रुपये तक का मुफ्त स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराकर सरकार ने बुनियादी जरूरतों को प्राथमिकता दी।

सरकारी दावों के मुताबिक, इन योजनाओं का मकसद सिर्फ घोषणाएं करना नहीं, बल्कि आम आदमी के जीवन-स्तर को सीधे बेहतर बनाना है। गांवों और शहरों में लाभार्थियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि योजनाएं कागज़ों से निकलकर ज़मीन तक पहुंच रही हैं।

इसी कड़ी में मान सरकार ने ‘मेरी रसोई योजना’ शुरू करने का ऐलान कर एक और बड़ा कदम उठाया है। इस योजना के तहत लगभग 40 लाख परिवारों को मुफ्त राशन उपलब्ध कराया जाएगा। खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में इसे ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो राज्य में गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को बड़ी राहत मिल सकती है।
सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री ने प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं कि कोई भी पात्र व्यक्ति सरकारी योजना से वंचित न रहे। जिला स्तर पर समीक्षा बैठकें हो रही हैं और पारदर्शिता पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट है जनता का पैसा जनता की सेवा में। यही संदेश लगातार प्रशासनिक तंत्र को दिया जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में जनकल्याणकारी योजनाओं के बीच विपक्ष के लिए सरकार को घेरना आसान नहीं रह गया है। जहां विपक्ष वित्तीय बोझ और दीर्घकालिक प्रभावों पर सवाल उठाता है, वहीं सरकार अपने कार्यों को “ईमानदार और जनहितैषी शासन” का उदाहरण बताती है।

अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह कल्याणकारी मॉडल राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चा का विषय बनेगा? अगर योजनाओं का लाभ व्यापक स्तर पर जनता तक पहुंचता है, तो अन्य राज्यों के लिए भी यह एक मिसाल बन सकता है। फिलहाल इतना तय है कि पंजाब में जनकल्याण की राजनीति ने बहस का केंद्र बदल दिया है। आने वाले महीनों में और नई घोषणाओं की संभावना के साथ, राज्य की सियासत और भी दिलचस्प होने वाली है।

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