इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर फिर बड़ा और विनाशकारी हमला बोल दिया है। इजरायल और अमेरिका ने संयुक्त रूप से बड़ी सैन्य कार्रवाई करते हुए ईरान के सबसे संवेदनशील और रणनीतिक ठिकानों पर जोरदार हमले किए हैं। इस व्यापक अभियान के तहत मुख्य रूप से ईरान के रक्षा मंत्रालय और खुफिया मुख्यालय को निशाना बनाया गया है। इसके साथ ही, सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के कार्यालय, ‘एटॉमिक एनर्जी ऑफ ईरान’ के प्रतिष्ठानों और परचीन स्थित महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर भी भारी बमबारी की गई है। इस भीषण हमले की आंच ईरान के कई बड़े और प्रमुख शहरों तक पहुंची है। जिन शहरों को इस हमले में मुख्य रूप से निशाना बनाया गया है, उनमें राजधानी तेहरान के अलावा कॉम, तबरेज, करमनशाह, कराज और इस्फहान शामिल हैं।
इस भीषण हमले के बाद राजधानी तेहरान सहित पूरे देश में हवाई हमले के सायरन बजने लगे हैं और कई जगहों से आग की ऊंची लपटें तथा धुएं का गुबार उठता देखा जा रहा है। प्रमुख ईरानी समाचार पत्र तेहरान टाइम्स ने भी इन हमलों की पुष्टि करते हुए धमाकों के खौफनाक वीडियो जारी किए हैं। बताया जा रहा है कि इजरायल ने एक साथ करीब 30 जगहों पर ये जोरदार धमाके किए हैं, जिससे दोनों देशों के बीच युद्ध की स्थिति बन गई है।
परमाणु वार्ता की विफलता और ट्रंप की चेतावनी
यह सैन्य कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच चल रही परमाणु वार्ता पूरी तरह से बेनतीजा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान को हमलों की धमकियां दे रहे थे और अमेरिकी सेना ने पहले से ही ईरान की सामरिक घेराबंदी कर रखी है। दरअसल, अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को यूरेनियम संवर्धन करने और परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना चाहता है। इसके विपरीत, ईरान का स्पष्ट रूप से कहना है कि वह शांतिपूर्ण ऊर्जा उद्देश्यों के लिए एक परमाणु संपन्न देश बनना चाहता है और यूरेनियम संवर्धन का अपना अधिकार छोड़ने को कतई तैयार नहीं है। परमाणु कार्यक्रम को लेकर इसी तनातनी ने इस ताजा सैन्य टकराव की जमीन तैयार की है।
इजरायल में हाई अलर्ट, स्कूल और दफ्तर किए गए बंद
ईरान पर इस ताबड़तोड़ प्रहार के तुरंत बाद जवाबी कार्रवाई की आशंका को देखते हुए खुद इजरायल में भी खतरे के सायरन गूंजने लगे हैं। इजरायली रक्षा बलों (आईडीएफ) और वायुसेना ने देशवासियों के मोबाइल फोन पर आपातकालीन अलर्ट भेजकर उन्हें तुरंत सुरक्षित ठिकानों और बंकरों के पास रहने का सख्त निर्देश दिया है। सुरक्षा के मद्देनजर संवेदनशील इलाकों को खाली कराया जा रहा है। हालात की गंभीरता को देखते हुए इजरायल प्रशासन ने सभी गैर-जरूरी कार्यस्थलों, शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक सभाओं पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है और पूरे देश को ‘पूर्ण सक्रियता’ (हाई अलर्ट) मोड पर रखा गया है।

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