धार
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने धार स्थित भोजशाला परिसर में हिंदुओं को मां सरस्वती की पूजा के लिए पूरी अनुमति दे दी है। एएसआई ने 16 मई को जारी आदेश में कहा कि हाई कोर्ट ने अपने 15 मई के फैसले में भोजशाला को संरक्षित स्मारक और देवी वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर माना है।
एएसआई के आदेश में कहा गया है कि अदालत ने यह भी माना कि ऐतिहासिक साहित्य भोजशाला को परमार वंश के राजा भोज से जुड़े संस्कृत शिक्षा केंद्र के रूप में स्थापित करता है। आदेश के मुताबिक, राजा भोज से जुड़े साहित्य और स्थापत्य संदर्भ इस बात की ओर संकेत करते हैं कि यहां सरस्वती मंदिर मौजूद था। एएसआई के शोध में भी इस बात का समर्थन मिला है।
2003 का पुराना आदेश रद
एएसआई ने अपने आदेश में कहा कि हाई कोर्ट ने अप्रैल 2003 में जारी उस पुराने निर्देश को रद कर दिया है, जिसमें हिंदुओं के पूजा अधिकारों पर रोक और परिसर में मुस्लिम नमाज की अनुमति दी गई थी।
नए आदेश के अनुसार, भोजशाला को संस्कृत शिक्षा का केंद्र और देवी वाग्देवी का मंदिर मानते हुए हिंदू समुदाय को पूजा-अर्चना के लिए 'बिना किसी रोक-टोक के प्रवेश' का अधिकार दिया गया है। धार जिले में स्थित भोजशाला लंबे समय से विवाद का विषय रही है और इस मामले को लेकर कई कानूनी लड़ाइयां भी चली हैं।

आबकारी ने कल्दा में भारी मात्रा में कच्ची शराब और महुआ लाहन पकड़ा
स्कूल में मासूम बच्ची पर हमला, छात्र ने बेंच पर सिर पटककर ईंट से किया वार
दलजीत के अंतिम संस्कार पर पिता ने तोड़ी चुप्पी, मदद के नाम पर गुमराह करने का लगाया आरोप
हवाई यात्रियों के लिए राहत की खबर, बिलासपुर-कोलकाता उड़ान दोबारा होगी शुरू