पंजाब का ‘SSF मॉडल’ बना देश के लिए मिसाल: सड़क हादसों में होने वाली मौतें एक साल में आधी हुईं
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा गठित SSF ने पंजाब के हाईवे पर सड़क हादसों में होने वाली मौतों को आधा कर दिया है। 15 मिनट का रिस्पॉन्स टाइम और महिला कर्मियों की भागीदारी इसकी मुख्य विशेषता है।

चंडीगढ़ : मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान के विजन से उपजी ‘सड़क सुरक्षा बल’ (SSF) पंजाब के राजमार्गों पर एक रक्षक के रूप में उभरी है। जनवरी 2024 में अपनी स्थापना के बाद से, इस विशेष बल ने न केवल 50,000 से अधिक लोगों की जान बचाई है, बल्कि सड़क हादसों में होने वाली मौतों के आंकड़ों में 48 से 49 प्रतिशत की भारी कमी लाने में सफलता पाई है। पंजाब देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने राजमार्गों की सुरक्षा के लिए समर्पित ऐसी फोर्स तैयार की है।
‘प्लेटिनम मिनट्स’ का जादू: 15 मिनट में मदद मुख्यमंत्री मान के सख्त निर्देशों के तहत, SSF किसी भी दुर्घटना स्थल पर मात्र 15 मिनट के भीतर पहुँचती है। इस शुरुआती समय को ‘प्लेटिनम मिनट्स’ कहा जाता है, जहाँ त्वरित चिकित्सा सहायता मिलने से घायल के जीवित रहने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। आँकड़े गवाह हैं कि साल 2023 में जहाँ हाईवे पर 1,955 मौतें हुई थीं, वहीं 2024 में यह आंकड़ा घटकर 1,016 रह गया है।
लैंगिक समानता और पारदर्शिता सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में पंजाब सरकार ने एक और प्रगतिशील कदम उठाते हुए बड़ी संख्या में महिला कर्मियों को SSF में शामिल किया है। इसके अलावा, पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी वाहन कैमरों और वीडियो रिकॉर्डिंग सिस्टम से लैस हैं, जिससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हो गई है।



