राफेल फाइटर जेट डील: 114 नए लड़ाकू विमान खरीदने की तैयारी, भारत की वायुशक्ति होगी और मजबूत

रक्षा मंत्रालय 114 नए 4.5 पीढ़ी के राफेल फाइटर जेट खरीदने की तैयारी में है। 3.25 लाख करोड़ की इस डील से भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ेगी। जानिए क्यों अहम है यह सौदा।

भारतीय वायुसेना (IAF) की ताकत में जल्द ही जबरदस्त इजाफा होने जा रहा है। रक्षा मंत्रालय 114 नए 4.5 पीढ़ी के मल्टीरोल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए अंतिम रूपरेखा तैयार कर रहा है। लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये के इस मेगा प्रोजेक्ट को रक्षा खरीद बोर्ड (DPB) ने प्रारंभिक मंजूरी दे दी है।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के 18 फरवरी 2026 को होने वाले भारत दौरे से पहले इस डील पर चर्चा तेज हो गई है।

राफेल डील पर बड़ा कदम: भारत की सुरक्षा रणनीति को नई धार

भारत अपनी वायुसेना की ताकत को निर्णायक बढ़त देने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। रक्षा मंत्रालय 114 नए 4.5 पीढ़ी के फाइटर जेट खरीदने की तैयारी में है, जिसमें राफेल लड़ाकू विमान सबसे आगे हैं। इस प्रस्तावित सौदे की अनुमानित लागत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये है और रक्षा खरीद बोर्ड (DPB) पहले ही इसे प्रारंभिक मंजूरी दे चुका है।

सूत्रों के मुताबिक, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के फरवरी के तीसरे सप्ताह में भारत दौरे से पहले इस डील पर अहम चर्चा हो सकती है। इसे भारत-फ्रांस रक्षा साझेदारी के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

वायुसेना की जरूरत क्यों जरूरी?

फिलहाल भारतीय वायुसेना के पास करीब 30 सक्रिय फाइटर स्क्वाड्रन हैं, जबकि स्वीकृत संख्या 42 स्क्वाड्रन की है। यानी क्षमता और जरूरत के बीच बड़ा अंतर है। मौजूदा और भविष्य के सुरक्षा हालात को देखते हुए नए लड़ाकू विमानों की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है।

रक्षा सूत्रों के अनुसार, अगले सप्ताह होने वाली रक्षा मंत्रालय की उच्चस्तरीय बैठक में इस प्रस्ताव पर विस्तार से विचार किया जा सकता है।

4.5 पीढ़ी का ताकतवर राफेल

राफेल एक अत्याधुनिक 4.5 पीढ़ी का मल्टीरोल फाइटर जेट है, जो हवा से हवा और हवा से जमीन—दोनों तरह के मिशन में सक्षम है। इसमें आधुनिक रडार सिस्टम, एडवांस इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट, लंबी दूरी की मिसाइलें और सटीक हथियार शामिल हैं। हर मौसम और कठिन परिस्थितियों में ऑपरेशन करने की इसकी क्षमता इसे वायुसेना के लिए बेहद भरोसेमंद बनाती है।

‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

इस डील की खास बात यह है कि करीब 80 फीसदी राफेल विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा। फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन के साथ भारतीय निजी कंपनियां मिलकर इन विमानों का निर्माण करेंगी। योजना के तहत वायुसेना को 88 सिंगल-सीटर और 26 ट्विन-सीटर विमान मिलेंगे, जिनमें से ज्यादातर भारत में ही बनाए जाएंगे।

डील पूरी होने के बाद भारतीय वायुसेना के पास कुल राफेल विमानों की संख्या करीब 150 हो जाएगी। इसके अलावा नौसेना के लिए भी 26 राफेल मरीन विमान खरीदे जाएंगे, जो एयरक्राफ्ट कैरियर से उड़ान भरने में सक्षम होंगे।

बदलते हालात, बढ़ती चुनौती

सूत्र बताते हैं कि पाकिस्तान-बांग्लादेश और पाकिस्तान-चीन के बीच बढ़ती रणनीतिक नजदीकियों ने भारत की सुरक्षा चिंताओं को और गहरा किया है। ऐसे माहौल में 4.5 पीढ़ी के उन्नत मल्टीरोल फाइटर जेट्स की जरूरत और भी अहम हो गई है।

राफेल डील को सिर्फ एक खरीद नहीं, बल्कि भारत की दीर्घकालिक सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है—एक ऐसा कदम, जो आने वाले वर्षों में भारत की वायुशक्ति को निर्णायक बढ़त देगा।

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