अभिषेक अग्रवाल, देहरादून/चमोली: उत्तराखंड अपने तीर्थाटन और पर्यटन के लिए लोगों के दिल में जगह बनाए हुए हैं। देवभूमि की प्राकृतिक रंगत में रंगने के लिए यहां देश-विदेश के कोने-कोने से पर्यटक और तीर्थ यात्रियों का पहुंचना लगा रहता है। तीर्थ यात्री यहां के प्रसिद्ध देवालयों के दर्शन करने के लिए तो पर्यटक यहां की सुंदर वादियों और प्रकृति की अनुपम छटा का आनंद लेने पहुंचते हैं। देवभूमि में ही माणा गांव से लगभग 12 किलोमीटर की दूरी पर समुद्र तल से 18 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित देवताल अपने आप में अलौकिक और कई रहस्यमई कथाएं संजोए हुए हैं।
पुरातन मान्यताओं के अनुसार यहां विशेष अवसरों पर देवता स्नान करते हैं। मान्यता है कि द्वापर युग में भगवान श्री कृष्णा देवता से होते हुए ही कैलाश मानसरोवर पहुंचे थे। यह झील उत्तराखंड की सबसे ऊंची झील है। ये चारों तरफ से बर्फीली पहाड़ियों से घिरी हुई है। भारत-तिब्बत सीमा पर स्थित देवताल देश-विदेश के कोने-कोने से पर्यटक पहुंचते हैं। सीमा पर होने के कारण यहां आने के लिए प्रशासनिक अनुमति जरूरी है।
युद्ध और कोरोना से निजात के लिए हुई थी पूजा
भारत चीन युद्ध के 59 साल बाद सन 2021 में माणा गांव के ग्रामीणों ने क्षेत्र की खुशहाली और कोरोना महामारी से निजात पाने के लिए देवी देवताओं की पूजा अर्चना की थी। यहां आज भी विशेष अवसरों पर ग्रामीण अपने पितरों और देवी देवताओं की पूजा अर्चना करने पहुंचते हैं। यह स्थान रमणीक और अलौकिक सुंदरता से भरा होने के साथ-साथ लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ भी है।
प्रकृति की गोद में होने का अनुभव
समुद्र तल से 18 हजार फीट की चढ़ाई करने के बाद यहां पहुंचने वाले लोग प्रकृति की सुंदर छटा को देख सारी थकान भूल कर मंत्र मुक्त हो जाते हैं। चारों तरफ बर्फ के सफेद पहाड़ों के बीच स्थित यह नीले और साफ पानी से भरा ता

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