Bihu 2024: असम का रोंगाली बिहू का त्योहार फसलों से संबंधित है। इस दौरान, अच्छी फसल के लिए ईश्वर से धन्यवाद दिया जाता है और अगली फसल के लिए अच्छी उपज की प्रार्थना की जाती है। बिहू पर्व को अग्नि देव को समर्पित करते हैं। इसलिए आइए जानते हैं कि असम में इसे कैसे मनाया जाता है।
Bihu 2024: भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम में रोंगाली बिहू एक पारंपरिक त्योहार है। यह भी असमिया नव वर्ष की शुरुआत का पर्व है। वसंत आने की खुशी में भी यह पर्व मनाया जाता है। अधिकांश आदिवासी लोग रोंगाली बिहू को बड़े उत्साह से मनाते हैं। इस उत्सव में आप असम की पुरानी संस्कृति भी देख सकते हैं।
Bihu 2024 Date
बिहू पर्व तीन चरणों में विभाजित है। Jan मध्य से भोगली बिहू मनाया जाता है। यह माघ बिहू भी कहलाता है। वहीं, अप्रैल के मध्य में रोंगाली बिहू (बोहाग और हित बिहू भी कहलाता है) मनाया जाता है। कार्तिक महीने में कोंगाली बिहू, जिसे काती बिहू भी कहते हैं, मनाया जाता है। 14 अप्रैल 2024 को बोहाग, या रोंगाली बिहू, शुरू होगा और 20 अप्रैल 2024 तक चलेगा।
बिहू इस तरह मनाया जाता है
असम की संस्कृति में महत्वपूर्ण यह त्यौहार बड़े उत्साह से मनाया जाता है। इस दौरान घर को पूरी तरह से साफ-सफाई और सजाया जाता है। घर के मुख्य द्वार पर रंगोली बनाई जाती है और फूलों की मलाई लगाई जाती है। महिलाओं और पुरुषों ने इस उत्सव पर पारंपरिक कपड़े पहने हुए हैं।
पुरुष इस अवसर पर धोती-कुर्ता पहनते हैं, जबकि महिलाएं मेखला चादोर पहनती हैं। साथ ही इस दौरान दोई-चीरा, आलू पिटिका, पिठा, लारू, फिश करी और अन्य स्थानीय भोजन बनाने की भी परंपरा है। बिहू के दौरान असम की संस्कृति को दिखाने वाली झांकियां भी लगाई जाती हैं।
यह मान्यताएं हैं
रोंगाली बिहू के बारे में कई मत हैं। मवेशियों को रोंगाली बिहू के पहले दिन पानी में काली दाल और कच्ची हल्दी मिलाकर नहलाया जाता है। इस उत्सव पर गाय भी पूजा जाती है और साफ की जाती है। इस दौरान उन्हें बैंगन, लौकी आदि भी खिलाया जाता है।
इस परम्परा के अनुसार, ऐसा करने से मवेशी स्वस्थ रहते हैं और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। महिलाओं और पुरुषों ने ढोल नगाड़े बजाकर पारम्परिक बिहू नृत्य किया। माना जाता है कि इससे इंद्रदेव प्रसन्न होते हैं, जो बरसात करने के लिए अच्छी फसल देते हैं।

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