नई दिल्ली/वॉशिंगटन: जेफरी एपस्टीन के काले कारनामों से जुड़ी फाइलों के सार्वजनिक होने के बाद दुनिया भर के सत्ता केंद्रों में हड़कंप मच गया है। इन दस्तावेजों में दर्ज वित्तीय लेन-देन, ईमेल संपर्क और निजी मुलाकातों के विवरण ने कई देशों के प्रभावशाली चेहरों को बेनकाब कर दिया है। नैतिकता और जनता के दबाव के बीच अमेरिका से लेकर यूरोप तक कई दिग्गज अपने पदों से हाथ धो बैठे हैं।
अमेरिका में बड़े कॉर्पोरेट और सुरक्षा अधिकारियों की विदाई दस्तावेजों का सबसे विध्वंसक प्रभाव अमेरिका में दिखा है। फरवरी 2026 में प्रमुख लॉ फर्म के चेयरमैन ब्रैड कार्प ने ईमेल संपर्क सार्वजनिक होने के बाद इस्तीफा दे दिया। इससे पहले नवंबर 2025 में पूर्व ट्रेजरी सचिव लैरी समर्स और दिसंबर 2025 में एफबीआई (FBI) के डिप्टी डायरेक्टर डैन बोंजिनो को भी विवादों के चलते पद छोड़ना पड़ा।
ब्रिटेन और नॉर्वे: सरकार पर गहराया संकट ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की सरकार को उस समय बड़ा झटका लगा जब उनके चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैकस्वीनी ने इस्तीफा दे दिया। उन पर एपस्टीन से जुड़े संदिग्ध व्यक्तियों की नियुक्ति की सिफारिश का आरोप है। वहीं, नॉर्वे की वरिष्ठ राजनयिक मोना जूल ने भी अपने पुराने संपर्कों के उजागर होने के बाद पद से हटना ही बेहतर समझा।
यूरोप में ‘क्लीन स्वीप’ का दौर फ्रांस के पूर्व मंत्री जैक लैंग ने एक सांस्कृतिक संस्थान का पद त्याग दिया है। स्लोवाकिया के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और स्वीडन के कई उच्चाधिकारियों के नाम भी फाइलों में आने से हड़कंप मचा हुआ है। हालांकि कई लोगों पर सीधे आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं, लेकिन संस्थानों की साख बचाने के लिए इस्तीफों का यह सिलसिला लगातार बढ़ रहा है।

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