pitru paksh 2024
pitru paksh 2024: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, काशी भगवान शिव के त्रिशूल पर स्थित है। कहा जाता है कि काशी में आखिरी सांस लेने वाले व्यक्ति को मोक्ष मिलता है। लेकिन मरने पर मोक्ष प्राप्त नहीं करने वाले प्रेत योनि में प्रवेश करते हैं। महादेव की काशी में प्रेत योगी से मुक्ति पाने के लिए एक स्थान है। पितृपक्ष में, देश भर से श्रद्धालु इस तीर्थ में आते हैं और अपने परिजनों की मुक्ति के लिए श्राद्ध और तर्पण करते हैं।
वाराणसी में एक स्थान है जिसे पिशाच मोचन कुंड कहा जाता है। यह विमल तीर्थ भी कहलाता है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि इस कुंड के जल से श्राद्ध और तर्पण करने से पितरों को मुक्ति मिलती है। यह कहा जाता है कि इस तीर्थ का जल काशी में गंगा के आगमन से पहले का है।
ये विशिष्ट पूजा
पिशाच मोचन तीर्थ के पुरोहित नीरज कुमार पांडेय ने बताया कि जिस व्यक्ति की अकाल मृत्यु होती है, उनके आत्मा की शांति के लिए त्रिपिंडी श्राद्ध और नारायण बलि का अनुष्ठान किया जाता है। इस अनुष्ठान से भटकती आत्माओं को मुक्ति मिलती है और मोक्ष का द्वार भी खुलता है, जैसा कि मान्यता है। यह पूजा दुनिया में एकमात्र स्थान है जहां भटकती आत्माओं को मुक्ति मिलती है।
त्रिपिंडी श्राद्ध की प्रक्रिया क्या है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, तामसी, राजसी और सात्विक आत्माएं होती हैं, पुरोहित नीरज कुमार पांडेय ने बताया। उन्हें छुटकारा दिलाने के लिए त्रिपिंडी श्राद्ध किया जाता है। जिसमें तीन कलशों में विभिन्न रंगों के कपड़े लगाकर ब्रह्मा, विष्णु और महेश की पूजा की जाती है। नारायण फिर बलि देता है। इससे भटकती आत्माओं को मृत योनि से छुटकारा मिलता है।
काशी खंड पिशाच मोचन तीर्थ का उल्लेख करता है
पुरोहित नीरज कुमार पांडेय ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऋषि वाल्मीकि ने खुद इस तीर्थ पर शिव सहस्त्रनाम का पाठ किया था, जिससे एक पिशाच मुक्ति पाया गया था। जिससे प्रसन्न होकर भगवान शंकर ने पिशाच को मृत शरीर से छुटकारा दिलाया। काशी खंड, 54 वें अध्याय, काशी के तीर्थ स्थलों की सबसे विश्वसनीय पुस्तक में इस तीर्थ का उल्लेख है।

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